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जोधपुर से उड़ कर सिर्फ 18 मिनट में दुश्मन की सीमा में पहुंच सकता है हमारा सुखोई, तेजस भी होगा तैनात

जोधपुर, उत्तरलाई, नाल, फलोदी और पुणे से हमला कर सकते हैं एयरक्राफ्ट

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gajendra singh dahiya/जोधपुर. दक्षिण पूर्वी एशिया के सबसे बड़े वायुसैनिक हवाईअड्डे जोधपुर में तैनात सुखोई-30 एमकेआइ लड़ाकू विमान मात्र 18 मिनट में पाक की दक्षिण कमान के मुख्यालय कराची एयरबेस पहुंचकर वहां की वायु रक्षा प्रणाली को ध्वस्त कर सकते हैं। बाड़मेर के उत्तरालाई से 6 मिनट, गुजरात के नलिया से 5 और बीकानेर के नाल हवाईअड्डे से 14 मिनट में एयर अटैक हो सकता है। इनको पूना से एयर सपोर्ट मिलेगा। वायुसेना दिवस आठ अक्टूबर को मनाया जाएगा।

भारतीय वायुसेना की दक्षिण-पश्चिमी कमान का मुख्यालय पूना में है और जोधपुर इसका महत्वपूर्ण एयरबेस है। जोधपुर और पूना में भारत का प्रथम पंक्ति के लड़ाकू विमान सुखोई-30 की स्क्वाड्रन तैनात है। उधर पाकिस्तान का सबसे बड़ा एयरबेस कराची जोधपुर से 400 किलोमीटर दूर है। कराची में एफ-16 और पाकिस्तान में चीन के सहयोग से बने जेएफ-17 लड़ाकू विमान तैनात हैं। सुखोई-30 इन दोनों पर भारी है।

तेजस भविष्य का विमान
इसी साल पाकिस्तानी एयरफोर्स में शामिल सिंगल इंजन एयरक्राफ्ट जेएफ-17 की गति 1.6 मैक है। जबकि भारत में निर्मित तेजस-एलसीए भविष्य का विमान है जिसकी गति 2 मैक तक है। जोधपुर से मिग-27 की स्क्वाड्रन के अगले साल रिटायर होने पर तेजस की स्क्वाड्रन की तैनाती की संभावना है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लि. द्वारा तैयार तेजस को सन् 2016 में वाुयसेना में शामिल किया गया था।

डेजर्ट वारियर की ताकत

जोधपुर में वायु यौद्धाओं को डेजर्ट वारियर नाम दिया गया है। यहां सुखोई-30 की स्क्वाड्रन में 18 विमान हैं। इस स्क्वाड्रन संख्या 31 को लॉयन नाम दिया गया है। इसके अलावा मिग-27 अपगे्रडेड की दो स्क्वाड्रन है। स्क्वाड्रन संख्या-10 को डेजर्ट और स्क्वाड्रन संख्या-29 का नाम स्कोर्पियन है। इनके अलावा एचएएल मार्क-1 रुद्र हेलीकॉप्टर की स्क्वाड्रन संख्या-116 और एमआइ-17 हेलीकॉप्टर की स्क्वाड्रन संख्या-117 यहां तैनात है। बीकानेर और जैसलमेर में दूरी अधिक होने पर बीच में फलोदी एयरबेस बनाया गया है जहां रुद्र हेलीकॉप्टर तैनात है। चेतक व चीता हेलीकॉप्टर की यूनिट यहां से चली गई है। जोधपुर से आगे पश्चिमी सीमा पर उत्तरलाई, नलिया और नाल एयरबेस में मिग-21 तैनात हैं जो हमले के समय जोधपुर एयरबेस की सुरक्षा कर सकते हैं। जोधपुर एयरबेस पर अलग-अलग रेंज की आधुनिक मिसाइल पिछोरा, सैम और ओएसए-एके मिसाइल भी तैनात हैं।

जोधपुर हवाई अड्डे का इतिहास
तत्कालीन महाराजा उम्मेद सिंह ने 1924 में जोधपुर में हवाई पट्टी की नींव रखी। उन्होंने यहां 1931 में फ्लाइंग क्लब की स्थापना की और दो टाइगर मोथ विमान लेकर आए थे। एयर फोर्स स्टेशन पर इनके हैंगर बनाए गए थे। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान यहां पहला एलिमेंट्री फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल और वर्ष 1950 में यहां एयरफोर्स फ्लाइंग कॉलेज खोला गया। 70 के दशक में यहां लड़ाकू विमान तैनात किए गए।

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