तीनों भाई आइआइटियन, बड़े भाई की तरह आइपीएस बनना चाहता था कमेश

तीनों भाई आइआइटियन, बड़े भाई की तरह आइपीएस बनना चाहता था कमेश
तीनों भाई आइआइटियन, बड़े भाई की तरह आइपीएस बनना चाहता था कमेश

Ranveer Choudhary | Updated: 14 Sep 2019, 09:21:18 PM (IST) Jodhpur, Jodhpur, Rajasthan, India

- पहली बार में आइएएस मेन्स में नहीं हुआ चयन, दूसरी बार मेन्स से पहले की खुदकुशी

- 20 लाख के पैकेज की नौकरी छोड़ आइएएस की तैयारी कर रहा था
ह्यूमन स्टोरी

जोधपुर.
आइआइटी ( iit student suicide ) करने के बाद 20 लाख सालाना पैकेज की नौकरी छोड़ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आइएएस) परीक्षा की तैयारी कर रहे कमेश कंवरिया की खुदकुशी ( student suicide case ) से परिवार के साथ शहर के लोग भी सदमे में हैं। कमेश के दो भाई भी आइआइटियन हैं। सबसे बड़े भाई का आइपीएस में चयन हुआ, जिसकी हेदराबाद में ट्रेनिंग चल रही थी। कमेश भी बड़े भाई की तरह आइपीएस बनना चाहता था। पहली बार में आइएएस मेन्स में चयन नहीं होने पर दूसरी बार मेन्स की तैयारी कर रहा था। इसी बीच करीब 15 दिन पहले पढाई को लेकर तनाव में आने पर परिजन उसे दिल्ली से जोधपुर ले आए। परिजन उसे डिप्रेशन से उबारने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उसने शुक्रवार को ट्रेन के आगे कूद खुदकुशी कर ली। परिजन और रिश्तेदार अब भी समझ नहीं पा रहे कि आइआइटी ( b. tech student suicide ) जैसे शिक्षण संस्थान से बीटेक करने के बाद मिली सफलता के बावजूद उसने आखिर खुदकुशी क्यों की?

महामंदिर के परिहार नगर में रहने वाले राजूराम माइनिंग विभाग में सहायक लेखाधिकारी के पद पर कार्यरत है। उनके तीनों पुत्र कुंदन कंवरिया, नरेंद्र और कमेश कंवरिया तीनों आइआइटी पासआउट हैं। कमेश के बड़े भाई कुंदन का आइआइटी के बाद हाल ही में आइएएस परीक्षा में चयन हो गया था। वह अभी हैदराबाद में आइपीएस का प्रशिक्षण ले रहा है। नरेंद्र नासिक में ओएनजीसी में जॉब कर रहा है। कमेश भी बड़े भाई की तरह आइपीएस बनना चाहता था। उसने पहली बार में प्री की परीक्षा पास कर ली लेकिन मेन्स में पास नहीं हो पाया। दूसरी बार प्री क्लियर करने के बाद वह दिल्ली स्थित कोचिंग सेंटर में मेन्स की तैयारी कर रहा था। इस दौरान कुछ दिनों पहले वह पढ़ाई को लेकर डिप्रेशन में आ गया। परिजनों को इसका पता लगते ही वे उसे करीब दो सप्ताह पहले जोधपुर ले आए। जहां उसका डॉक्टर से इलाज भी करवाया।

आइएएस बनने के लिए 20 लाख के पैकेज की नौकरी छोड़ी
कमेश ने कानपुर आइआइटी से कम्प्यूटर सांइस में बीटेक की थी। बीटेक करते ही उसकी 20 लाख सालाना पैकेज की नौकरी मिल गई। लेकिन कमेश ने आइएएस बनने के लिए नौकरी छोड़ दी। उसने अपना सपना पूरा करने के लिए दिल्ली में आइएएस की तैयारी शुरू की।

भाई का चेहरा कैसे देखूं

महामंदिर पुलिस ने कमेश के शव का शनिवार को एमजीएच मोर्चरी में पोस्टमार्टम करवाया। बड़े भाई कुंदन के हैदराबाद से अपने दोस्त के साथ जोधपुर पहुंचने पर घर जाने की बजाए सीधे मोर्चरी पहुंचे। जहां भाई के शव को देख रोते हुए एक ही बात कह रहे थे कि ऐसी हालत में भाई का चेहरा कैसे देखूं...?
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एक्सपर्ट व्यू
सपने देखो, लेकिन किसी से तुलना नहीं करें

- डिप्रेशन से पीडि़त व्यक्ति इस संबंध में परिजनों को हिंट (इशारा) जरूर देता है। उसे समझने की जरूरत है। परिजनों को उसकी छोटी से छोटी परेशानी पर बात करनी चाहिए।
- युवाओं को डिप्रेशन से बचने के लिए एक बात समझनी होगी कि हर बार सफलता नहीं मिलती। सपने बड़े रखो लेकिन जरूरी नहीं कि पहली बार में सफलता मिल जाए।

- असफलता मिलने पर उसे स्वीकार करने की क्षमता होनी चाहिए।
- खुद को और परिजनों को भी अपने बच्चों की दूसरे बच्चों से तुलना नहीं करनी चाहिए। तुलना करने पर ही बच्चे डिप्रेशन में आते हैं। उन्हें लगता है कि उनके जीवन का अब कोई मतलब नहीं रह गया।

- डॉ. जीडी कूलवाल, विभागाध्यक्ष, मनोविकार विभाग, एसएन मेडिकल कॉलेज

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आइआइटियन इसलिए बनना चाहते हैं आइएएस?

1. आइएएस में जॉब सिक्योरिटी सबसे ज्यादा है। जबकि बीटेक करने के बाद उस स्तर की जॉब के लिए एक्स्ट्राऑर्डिनरी प्रयास करने पड़ते हैं।

2. आइआइटी करने के बाद भारत में इनोवेशन और स्टार्टअप जैसी जॉब भी नहीं मिलती। उसके लिए बाहर जाना पड़ता है।

3. आजकल आइआइटी पासआउट बहुत अधिक छात्र-छात्राएं निकलते हैं। जिस कारण उनके सामने चुनौती बनी रहती है। आइएएस में उन्हें सामाजिक ओहदे के साथ इन सभी चिंताओं से मुक्ति मिल जाती है।

-अमरदीप, पीआरओ, आईआईटी जोधपुर

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