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भूखण्ड विवाद के चलते सरेराह फंदे पर झूल जान देने का प्रयास

बरना (जोधपुर). बरसों से भूखंड विवाद नहीं निपटने के गुस्साए एक प्रौढ़ केवलराम ने बस स्टैंड के सामने फंदे पर झूलकर जान देने का प्रयास किया।
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Attempted suicide

भूखण्ड विवाद के चलते सरेराह फंदे पर झूल जान देने का प्रयास

बरना (जोधपुर). बरसों से भूखंड विवाद नहीं निपटने के गुस्साए एक प्रौढ़ केवलराम ने बस स्टैंड के सामने फंदे पर झूलकर जान देने का प्रयास किया। इससे पूरा गांव में सनसनी फैल गई और भीड़ घटनास्थल पर जमा हो गई।

ग्रामीणों की समझाइश पर उसने जान नहीं देने की बात तो मान ली लेकिन विवाद नहीं निपटने तक धरना देने पर अड़ गया। अपने परिजनों के साथ घरेलू सामान व मवेशियों को लेकर सहकारी भवन में आ धमका और धरना शुरू कर दिया। देर रात यह समाचार लिखे जाने तक उसका धरना जारी था। देर रात तक वहां न तो कोई अधिकारी पहुंचा और न ही पुलिस।

1965 में प्रौढ़ केवलराम पुत्र जोगाराम सरगरा के बरना गांव स्थित उसके भूखण्ड पर बरना सहकारी सेवा समिति भवन बनवाया गया था। इस भूखण्ड की एवज में तत्कालीन सरपंच गंगासिंह व ग्रामीणों की मौजूदगी में गांव में पुलिये के निकट उसके पिता को भूखण्ड आवंटित कर दिया गया था। बाद में इसका पट्टा सरपंच हिम्मत सिंह के कार्यकाल में बनवा कर दे दिया गया था।


इस प्रकार यह भूखण्ड उसके पक्ष में हो गया था। वह इसे लेकर निश्चिंत था। इस बीच उसे पता चला कि उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार नदी-नाले के निकट वाले भूखण्डों के पट्टे नहीं बनाए जा सकते। इस आधार पर उसका पट्टा खारिज हो गया।

इससे बात को लेकर वह काफी आहत था। उसने इस भूखण्ड के बदले दूसरा भूखंड आवंटित करने काफी प्रयास भी किए। आखिर उसने शुक्रवार शाम करीब साढ़े चार बजे रस्सी से फंदा बनाया और सहकारी समिति परिसर स्थित नीम के पेड़ पर झूलने लगा। उसके भाई व ग्रामीणों ने ऐसा करते देख लिया, लेकिन वह जान देने पर आमादा था। काफी देर समझाइश के बाद वह माना।

उसके फंदा लगाने के प्रयास की सूचना गांव में आग की तरह फैल गई और देखते ही देखते लोग मौके पर एकत्र हो गए। सूचना पाकर सरपंच गोप सिंह व अन्य लोग में वहां पहुंचे और उसे समझाने का प्रयास किया।

सरपंच गोपसिंह ने उसे आश्वासन दिया कि शनिवार को पंचायत कार्यालय समय के दौरान उसे पुलिये के पास वाले भूखण्ड की एवज में अन्यत्र भूखण्ड उपलब्ध कराने पर विचार किया जाएगा। इस पर वह मान तो गया लेकिन शाम होते-होते वह अपने परिवार के सदस्यों के साथ घरेलू सामान और मवेशियों को लेकर सहकारी समिति परिसर में आ गया। उसका कहना था कि जब तक उसे न्याय नहीं मिल जाता सहकारी समिति परिसर में ही रहेगा।

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