सीमावर्ती जिलों के पेट्रोल पंपों की औसत बिक्री 60 से 70 प्रतिशत घटी

-प्रदेश में 2 साल में केवल 5 लाख लीटर नकली बायोफ्यूल जब्त
- 5 महीने से बायोफ्यूल का कच्चा माल प्रदेश में खत्म, फिर कहां से आ रहा है बायोफ्यूल ?
- गुजरात से आ रहे बेस ऑयल व पैराफीन ने राज्य सरकार को भारी नुकसान, राजस्व 12 प्रतिशत घटा
- 139 प्रकरण व 80 एफआइआर के बावजूद पुलिस अपराध की जड़ तक नहीं पहुंची

By: Gajendrasingh Dahiya

Updated: 06 Oct 2021, 08:11 PM IST

जोधपुर. बायोफ्यूल के नाम पर गत दो वर्ष से प्रदेश में धड़ल्ले से बिक रहे नकली डीजल, बेस ऑयल, पैराफिन ने सार्वजनिक क्षेत्र की तीनों तेल कम्पनियों इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम की बिक्री पर चूना लगा दिया है। सीमावर्ती जिलों के पेट्रोल पंपों की औसत बिक्री 60 से 70 प्रतिशत तक कम हो गई है। तीनों कम्पनियों के प्रदेश के राज्य समन्वयक सुनील गर्ग के मुताबिक अवैध व्यापार से राज्य सरकार को 12 प्रतिशत राजस्व हानि हुई है, जो करोड़ों रुपयों में है। हालांकि पुलिस व अन्य सरकारी मशीनरी ने पेट्रोल पंप संचालकों की लगातार शिकायतों पर दो साल में कार्रवाहियां करके 139 प्रकरण और 80 एफआईआर दर्ज की हैं, बावजूद इसके अब तक एक भी मामले में किसी भी बड़े अवैध कारोबारी को न तो पकड़ा गया है और न ही उनका नेटवर्क तोड़ा गया है। दो साल में पुलिस ने केवल 5.64 लाख लीटर अवैध तेल ही जब्त किया है जो अवैध कारोबारियों की एक दिन की अवैध बिक्री है।

5 महीने से कच्चा माल खत्म, अब कहां से आ रहा बायो फ्यूल
राज्य बायोफॅ्यूल प्राधिकरण ने प्रदेश में 11 कम्पनियों को बायोफ््यूल के विनिर्माण और 57 आउटलेट रिटेलर्स के माध्यम से बायोफ्यूल बिक्री की अनुमति दी है । लेकिन तेल कम्पनियों के अनुसार प्रदेश में अप्रेल 2021 से बायोफ्यूल का कच्चा माल ही नहीं है। ऐसे में प्रदेश में वर्तमान में बिक रहा अधिकांश बायोफ्यूल अवैध है।

अप्रेल 2019 से अनुमति, 7 से 20 प्रतिशत डीजल में करना होता है मिश्रित
केंद्र सरकार ने अप्रेल 2019 में देश में बायोफ्यूल की रिटेल बिक्री को मंजूरी दी थी, जिसके अंतर्गत डीजल में 7 से 20 प्रतिशत तक बायोफ्यूल (एथेनॉल सहित अन्य उत्पाद) मिलाकर बेचा जा सकता है, लेकिन अवैध कारोबारियों ने गुजरात की रिफाइनरी से जुड़ी कुछ कम्पनियों से सम्पर्क करके बायोफ्यूल के नाम पर बेस ऑयल और पैराफिन की बिक्री शुरू कर दी। इससे प्रदेश के पेट्रोल पम्पों को सीधा नुकसान हो रहा है। डीजल में इसके मिश्रण को मापने का भी कोई तरीका राज्य सरकार ने विकसित नहीं किया है।

डीजल 100 रुपए, बायोफ्यूल की मनमर्जी की रेट
केंद्र व राज्य सरकार ने बायोफ्यूल की अब तक कोई रेट निर्धारित नहीं की है। डीजल 100 रुपए प्रति लीटर है, जबकि बायोफ्यूल के नाम पर अवैध डीजल व बेसऑयल 60 से 70 रुपए प्रति लीटर में हाई-वे पर खड़े रिटेलर की ओर से बेचा जा रहा है। ट्रकें, लोडिंग गाडिय़ां और प्राइवेट बसें अब रास्ते में बिक रहा यही बायोफ्यूल टैंक में डलवा रही हेै।

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‘हाई-वे के पेट्रोल पम्प पहले जो एक दिन में 20 किलोलीटर डीजल बेचते थे, अब वे 2-3 किलोलीटर भी मुश्किल से बेच पा रहे हैं। बायोफ्यूल के नाम पर नकली डीजल बेचा जा रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि इस पर कोई खास कार्यवाही नहीं हुई है।’
- गोपाल सिंह, जिलाध्यक्ष, राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन।

Gajendrasingh Dahiya Reporting
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