
निजी अस्पताल में बैंककर्मी प्रसूता-जुड़वा नवजात की मौत, परिजनों ने किया हंगामा
जोधपुर.
चौपासनी हाउसिंग बोर्ड स्थित निजी अस्पताल में 8 माह की गर्भवती एसबीआइ कर्मचारी प्रसूता व उसके दो जुड़वा नवजात की मंगलवार तड़के मृत्यु से गुस्साए परिजनों ने हंगामा किया। पुलिस ने समझाइश कर मामला शांत कराया। चिकित्सक व नर्सिंगकर्मियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर एमडीएम अस्पताल में मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया गया।
पुलिस के अनुसार मण्डोर क्षेत्र के फतेहबाग निवासी व्यवसायी चंदन परिहार ने चौहाबो में वसुंधरा अस्पताल के रेजिडेंट चिकित्सक व नर्सिंगकर्मियों के खिलाफ लापरवाही बरतने से पत्नी व दो जुड़वा नवजात की मृत्यु होने का मामला दर्ज कराया है। थानाधिकारी लिखमाराम के अनुसार एफआईआर में डॉ रेणू मकवाना का नाम भी है। मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई है।
मृतका के पति चंदन परिहार ने एफआइआर में बताया कि गर्भस्थ पत्नी दीपा कच्छवाह (33) की नियमित जांच के लिए सोमवार दोपहर 12 बजे अस्पताल लाया था। जांच में गर्भ में जुड़वा बच्चे होने की जानकारी दी गई थी। सभी जांच के बाद प्रसूता की स्थिति सामान्य बताई थी। दीपावली के 8-10 दिन बाद प्रसव कराने के बारे में अवगत कराया था। इस बीच, जूनियर डॉक्टर ने डा रेणु मकवाना को रिपोर्ट भेजी। फिर तुरंत ऑपरेशन करने की जरूरत बताते हुए प्रसूता को भर्ती कर लिया गया।
परिजनों ने सीनियर डॉक्टर की अनुपस्थिति में ऑपरेशन शुरू करने का विरोध भी किया। प्रसूता को इंजेक्शन लगाते ही चेहरे पर लाल निशान और गले पर सूजन आ गई। तबीयत ज्यादा बिगडऩे लगी। फिर डॉ. रेणू अस्पताल आईं। सिजेरियन के लिए उनसे हस्ताक्षर करा लिए गए। बिना ऑक्सीजन व्यवस्था के प्रसूता एक घंटे तड़पती रही। सिजेरियन में दीपा ने पहले लड़के को जन्म दिया। दो घंटे बाद बताया गया कि लड़के की मौत हो गई। पत्नी की हालत गंभीर बताते हुए 10 मिनट में एक लाख रुपए जमा कराने को कहा। पंद्रह मिनट बाद प्रसूता और दूसरी नवजात बच्ची की मौत की सूचना दे दी गई।
मानवाधिकार आयोग ने लिया प्रसंज्ञान
राज्य मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लेते हुए प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, जोधपुर पुलिस आयुक्त व जिला कलक्टर से 9 नवम्बर तक तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है।
इनका कहना हैं
प्रसूता की डिलीवरी प्लान थी। डिलीवरी के लिए ऑब्जर्वेशन में रोकना था। टेस्ट डोज रिएक्शन हो गई। इसे एलर्जी रिएक्शन बोल सकते हैं। सारी एंटीबायोटिक लगाने से पहले टेस्ट होते हैं। इसको एनाफिलेक्सिस कहा जाता है। बाकी कोई दूसरा कारण नहीं है। सभी सीनियर डॉक्टर मौके पर मौजूद थे। मरीज हमारे यहां दिखाता था। कोई किसी को नहीं मारना चाहता। ऐसे इंजेक्शन दूसरे मरीज को भी लगे, उनके कुछ नहीं हुआ।
- डॉ. संजय मकवाना, संचालक, वसुंधरा हॉस्पिटल
Published on:
02 Nov 2021 10:37 pm
