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धन्य हैं भामाशाह! सरकारी से जितने चिकित्सा उपकरण मिले उतने भामाशाहों ने भी उपलब्ध करवा दिए

कोरोना की जंग लड़ते हुए जिस उपकरणों की सबसे ज्यादा जरूरत वॉरियर्स होती है वह मेडिकल व सर्जिकल आइटम है। सरकर ने अपने स्तर पर जिस प्रकार के उपकरण उपलब्ध करवाए उतना ही योगदान शहर के भामाशाहों ने ही कर दिया।
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अविनाश केवलिया/जोधपुर. कोरोना की जंग लड़ते हुए जिस उपकरणों की सबसे ज्यादा जरूरत वॉरियर्स होती है वह मेडिकल व सर्जिकल आइटम है। सरकर ने अपने स्तर पर जिस प्रकार के उपकरण उपलब्ध करवाए उतना ही योगदान शहर के भामाशाहों ने ही कर दिया। एक सुकून देने वाली बात यह है कि कई ऐसे चिकित्सकीय उपकरण जो जान बचाने में महत्वपूर्ण हैं इसके लिए सरकार की ओर देखने की जरूरत ही नहीं।

पीपीई किट - डॉक्टर्स व कोरोना वॉरियस के लिए पर्सनल प्रोजेक्शन किट यानि कि पीपीई किट की आवश्यकत सबसे ज्यादा होती है। सरकार की ओर से 1923 ऐसे किट उपलब्ध करवाए गए तो भामाशाहों के सहयोग से 1890 और किट जुटा लिए। एनआइएफटी ऐसे किट को डिजाइन करने का काम कर रहा है, इसके बाद दानदाताओं के सहयोग से 7 हजार और किट तैयार करवाए जाएंगे।

एन 95 मास्क - अस्पताल में संक्रमण के बीच यह जीवन रक्षक है। सरकार ने 8500 ऐसे मास्क उपलब्ध करवाए। भामाशाह के सहयोग से 6500 की और खरीद हुई।

थर्मल गन - प्रारंभिक स्क्रीनिंग के लिए थर्मल गन तापमान नापने के लिए जरूरी उपकरण है। सरकार ने 50 ऐसे उपकरण उपलब्ध करवाए। सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से 169 उपकरण और खरीदे गए।

चश्मे - पीपीई किट व मास्क के साथ आंखों की सुरक्षा के लिए जरूरी। सरकार की ओर से 749 व भामाशाहों के सहयोग से 3001 उपलब्ध हुए।

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