आरटीई नि:शुल्क शिक्षा का अधिनियम के तहत गैर सरकारी स्कूलों में प्रवेश के लिए सोमवार से रिपोर्टिंग शुरू हुई। जिसके तहत पूर्व में आवेदन किए गए पत्रों की प्रवेश वरीयता जारी होने के बाद अभिभावकों की ओर से रिपोर्टिंग की जा रही है।
आरटीई नि:शुल्क शिक्षा का अधिनियम के तहत गैर सरकारी स्कूलों में प्रवेश के लिए सोमवार से रिपोर्टिंग शुरू हुई। जिसके तहत पूर्व में आवेदन किए गए पत्रों की प्रवेश वरीयता जारी होने के बाद अभिभावकों की ओर से रिपोर्टिंग की जा रही है। लेकिन रिपोर्टिंग शुरू होने के दूसरे दिन ही अभिभावकों व ई मित्र संचालकों का फर्जीवाड़ा उजागर हो गया। सोमवार से निजी स्कूलों की ओर से आरटीई के आवेदन पत्रों की ऑनलाइन जांच शुरू की गई। जिसके बाद विद्यालयों द्वारा संबंधित अभिभावकों से प्रवेश के लिए मूल दस्तावेजों से सत्यापन किया तो खुलकर गड़बड़ी सामने आई।
नि:शुल्क शिक्षा के क़ानून के ग़ैर सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा में प्रवेश के लिए आयु 6 से 7 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है। अब जो विद्यार्थी निर्धारित आयु वर्ग में शामिल नहीं हो पा रहे है। उनके अभिभावकों ने ई मित्र संचालकों से मिलीभगत सांठ गांठ करते हुए जन्म प्रमाण पत्र व आधार कार्ड में ग़लत तरीके से जन्मतिथि को एडिट करते हुए आवेदन कर दिए। कई विद्यालयों में ऐसे प्रकरण देखने को मिल रहे है। जिसमें कागजी खानापूर्ति पूर्ण करने के लिए शिक्षा विभाग के नियमों को ताक पर रखते दस्तावेजों में मनमर्जी से बदलाव कर दिए।
ई मित्र मित्र संचालकों की ओर से मूल दस्तावेजों में छेड़खानी करते हुए नि:शुल्क शिक्षा के तहत कागजात अपलोड करने का मामला सामने आया है। विभागीय दिशा निर्देशों को दरकिनार करते हुए दस्तावेजों में छेड़छाड़ करना कानूनी तौर पर गलत कृत्य है। जन्मतिथि या अन्य किसी आधार पर किए फर्जी आवेदन पत्रों को जांच कर हटवाया जाएगा। अन्य आवेदन पत्रों को भौतिक सत्यापन के दौरान अयोग्य करार दिया जाएगा।
गायड़सिंह, सीबीईईओ, बालेसर