
700 किमी का भ्रमण कर बिलाड़ा लौटा आई माता का रथ
बिलाड़ा (जोधपुर) . आई पंथ के श्रद्धालुओं में आध्यात्मिक भाव बने रहे, और अपनी कुलदेवी के दर्शन उनके गांव कस्बों में हो सके, इसके लिए संपूर्ण मारवाड़ एवं गुजरात के गांव में भ्रमण कर मंगलवार को आई माता का रथ यहां बडेर पहुंचा। इसके साथ आए जत्ती एवं बाबा मंडली का गाजो बाजो के साथ बधावा हुआ।
वहीं महिलाओं ने माता जी के मंगल गीत गाए। करीब एक सप्ताह पूर्व गुजरात के बनासकांठा से रवाना हुआ यह विभिन्न गांवों-कस्बों से होते हुए करीब 700 किलोमीटर की दूरी तय कर बिलाड़ा पहुंचा।
छह सौ वर्ष से चल रही पम्परा
अन्य धर्मों एवं पंथों में आई पंथ ही ऐसा अलग पंथ है ,जिसमें श्रद्धालुओं को दर्शन देने के लिए बिलाड़ा बडेर से यह आई माता का रथ निकलता है। इसमें माता जी की अखंड ज्योत रहती है तथा माता जी की प्रतीकात्मक प्रतीमा विराजित है। बैलों से चलने वाला यह रथ गांव- ढाणियों, कस्बों की हर बडेर तक पहुंचता है।
जहां आई पंथ के श्रद्धालु पहुंचकर रथ में विराजित माताजी एवं अखंड ज्योत के दर्शन करते हैं। कई बार बड़े कस्बों में कई जगहों पर अलग-अलग बडेर बनी होती है, तो वहां यह रथ कई दिनों तक ठहरता है। रथ के साथ यहां पहुंचे पूना बाबा ने बताया कि इस बार वह बैलों से चलने वाले रथ से सात सौ किलोमीटर की यात्रा कर छोटे-बड़े 422 गांवों का भ्रमण किया।
उन्होंने बताया कि इस रथ को कई बार कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र में बनने वाली आई माता जी की बडेर की प्रतिष्ठा के दौरान निमंत्रण मिलता है। इसके लिए दीवान माधवसिंह ने रथ एवं बैलों की जोड़ी के लिए विशेष बस बनवाई है। इसके माध्यम से वे सैंकड़ों किलोमीटर की दूरी तय कर पहुंचते हैं।
यहां पहुंचे रथ की बड़े पुजारी भंवर महाराज, कामदार शंकर सिंह राठौड़, भंवरलाल राठौड़, बाबूलाल एवं आई पंथ के दर्जनों अनुयायियों ने अगवानी कर रथ को दर्शन के लिए बडेर प्रांगण में खड़ा करवाया है।
Published on:
24 Oct 2018 12:22 am
