
चांदेलाव तालाब पहुंचा बर्ड फ्लू
जोधपुर/भावी. जिले के कापरडा, ओलवी व रामासनी के बाद बर्ड फ्लू संक्रमित मेहमान पक्षियों कुरजां का समूह अब चांदेलाव तालाब तक पहुंच गया। रामासनी तालाब पर आठ मृत कु रजां मिलने के साथ बर्ड फ्लू से शनिवार तक जिले में कुल 184 कुरजां की मौत हो चुकी है। रामासनी तालाब पर मिली कुरजां को वन विभाग की टीम ने गाइडलाइन पालना के साथ दफ नाया गया। वहीं बर्ड फ्लू की रोकथाम के लिए वन विभाग, पशुपालन विभाग व चिकित्सा विभाग के अधिकारी जिला कलक्टर के निर्देशन में टीमें बनाकर जांच व कार्यवाही में जुट गए है।
बीसीएमओ जितेन्द्रसिंह चारण ने कापरडा में चिकित्सा विभाग के कर्मचारियों की बैठक लेकर कलक्टर की ओर से जारी निर्देशों व कार्यप्रणाली से अवगत करवाया। चारण ने रामासनी, कापरडा, ओलवी गांव में घर- घर सर्वे करने, सर्दी, बुखार, खांसी व जुकाम सहित सांस की तकलीफ वाले मरीजों का पता लगाने व उनकी सूची तैयार करने के निर्देश दिए। प्रतिदिन शाम पांच बजे रिपोर्ट देने की बात कही। ऐसे मरीजों को टेबलेट दी जाएगी। अधिक तकलीफ होने पर जिला प्रशासन को सूचना कर जोधपुर से मेडिकल टीम को बुलाया जाएगा। गठित टीमों की ओर से पक्षियों के पड़ाव स्थल वाले प्रमुख तालाब के आसपास रहने वालों को चिह्नित किया जा रहा है। वहीं पशुपालन विभाग ने कापरडा व रामासनी में मुर्गी रखने वालों की सूची बनाकर मुर्गियों की जांच की।
रक्षा संस्थान जयपुर के अध्यक्ष रोहित गंगवाल ने बताया कि शनिवार को जिला कलक्टर इन्द्रजीत सिंह ने नागपुर, दिल्ली व जयपुर से पहुंची एनजीओ की मेडिकल टीम के साथ बैठक में बर्ड फ्लू की रोकथाम, कुरजां के बचाव को लेकर चर्चा की। कलक्टर ने मेडिकल टीम को प्रोटोकॉल से योजनाबद्व तरीके से सक्रियता के साथ कार्य करने की बात कही। जवाई बांध की ओर से बढ़ रहे समूह मेडिकल टीम ने सर्वे में पाया कि कापरडा व रामासनी के बाद कुरजां का दल पाली जिले के जवाई बांध की ओर आगे बढ़ रहा है। ऐसे मे मेडिकल व बचाव टीमें अब पाली जाएगीं और जवाई बांध में आने वाली कुरजां की जांचे कर नमूने भोपाल लैब भेजे जाएंगे। जलाशयों की गठित टीमें रोजाना निरीक्षण कर वस्तुस्थिति की जानकारी लेकर कलक्टर को रिपोर्ट भेजेंगी।
तेजी से फैलती है बीमारी
एवियन इन्फ्लुएंजा नाम के वायरस से फैलने वाली बीमारी बर्ड फ्लू पक्षियों और जानवरों के साथ इंसानों में भी तेजी से फैलती है। चूंकि हम पहले ही कोरोना जैसी वैश्विकमहामारी से जूझ रहे हैं। ऐसे में बर्ड फ्लू से बचाव के लिए हम सभी को हर संभव सावधानी बरतनी जरूरी है क्योंकि ये बीमारी भी तेजी से फैल सकती है। जहां घायल अथवा मृत पक्षी मिल रहे है उनसे ग्रामीण दूर रहें तथा आस-पास घायल एव मृत पक्षी दिखाई देने पर इसकी सूचना संबंधित क्षेत्र के वनकर्मी अथवा पशुपालन विभाग को दें।
डॉ. हेमसिंह गहलोत, वन्यजीव विशेषज्ञ
घबराए नहीं, सावधानी बरते
एवियन इन्फ्लुएंजा का वाइरस कोरोना वाइरस की तरह ही तेजी से फैलता है। ऐसी स्थिति में सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन का पालन करना चाहिए। संक्रमित स्थान जहां पक्षियों की मृत्यु हुई है उनसे आमजन दूर रहे। किसी भी घायल पक्षी को आमजन ख़ुद बचाने की कोशिश ना करे बल्कि इसकी सूचना सम्बंधित क्षेत्र के वन कर्मचारियों को दें। भोपाल से रिपोर्ट आने से पहले यदि कोई आमजन यदि उन संक्रमित स्थानों पर गया है और उन्हें सर्दी-जुकाम या फ़्लू के लक्षण महसूस होते हैं तो उनको टेस्ट करवा कर चिकित्सक के निर्देशानुसर एंटीवाइरल दवाएं लेनी चाहिए। बर्ड फ़्लू में मृत्यु असामान्य संख्या में होती है, अत: किसी को 1 या 2 पक्षी मृत मिले तो घबराएं । किसी भी पक्षी की प्राकृतिक मृत्यु को बर्डफ़्लू से जोडऩे जैसी अफवाहों से भी बचना चाहिए। प्राकृतिक रूप से मृत पक्षी को दफऩा देना चाहिए।
-डॉ. ज्ञान प्रकाश, वन्यजीव चिकित्सक व प्रभारी, वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू सेंटर जोधपुर संभाग
Published on:
13 Nov 2021 08:14 pm
