सहज, सरल व यथार्थवादी अभिनय का सरताज एक संपूर्ण कलाकार इरफान खान हमारे बीच नहीं है लेकिन जोधपुर से उनका गहरा जुड़ाव रहा है। परकोटे के भीतरी क्षेत्र जालप मोहल्ला में उनके ननिहाल है जहां इरफान बचपन से ही आते रहे है।
जोधपुर. सहज, सरल व यथार्थवादी अभिनय का सरताज एक संपूर्ण कलाकार इरफान खान हमारे बीच नहीं है लेकिन जोधपुर से उनका गहरा जुड़ाव रहा है। परकोटे के भीतरी क्षेत्र जालप मोहल्ला में उनके ननिहाल है जहां इरफान बचपन से ही आते रहे है। फिल्मों में सफल होने के बाद भी नानी रजिया बेगम और उनके बड़े मामा डॉ. आसिफ निसार और डॉ. साजिद निसार से उनका मिलना होता रहा। डॉ. साजिद निसार ने बताया कि भांजे इरफान से आखिरी बार 2018 में जैसलमेर शूटिंग के लिए आया तब मिला था। उससे पहले 2009 में जालप मोहल्ला ननिहाल आया तब नानी और पूरे परिवार के साथ लंच किया था। व्यस्त होने के बाद फोन पर जरूर बातें होती थी।
वरिष्ठ रंगकर्मी मदन बोराणा ने पत्रिका को बताया कि सहज, सरल व यथार्थवादी अभिनय का सरताज एक संपूर्ण कलाकार था अभिनेता इरफान। मेरा अजीज मित्र, फिल्मी दुनियां में मेरे संघर्ष का साथी इरफान की आज मृत्यु का समाचार सुनकर गहरा आघात पहुंचा। मेरा इरफान से बहुत पुराना नाता रहा है। सन 1986 में हम दोनों को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, (एनएसडी) नई दिल्ली में प्रवेश के लिए साक्षात्कार पत्र आया था। संयोग से मेरा नाम प्रतिक्षा सूची में और इरफान का चयन हो गया। मैं अक्सर अपने व्यापार के सिलसिले से दिल्ली जाता तब हम मिलते रहते थे।
वर्ष 1989 में एनएसडी का कोर्स पूरा होते ही वह दिल्ली से मुंबई चला गया। मुझे भी उसने मुंबई बुलाया। इरफान के साथ ही गोरेगांव स्थित एक गेस्ट हाउस में रहकर हम दोनों ने संघर्ष किया। टीवी धारावाहिक भारत एक खोज, चाणक्य, सवेरा आदि सीरियल में साथ में काम किया था। मगर छोटे रोल के कारण आत्म संतुष्टि नहीं मिलती थी। दो साल के संघर्ष के बाद पारिवारिक कारणों से मैं मुंबई छोड़कर जोधपुर लौट आया। संघर्ष के दिनों में इरफान मुझसे कहता था कि 'बदल के सारे जहां का निजाम रख दूंगा, अभी तो मैं देख रहा हूँ हवा जमाने की।