छठ व्रती महिलाओं ने अस्तांचलगामी सूर्य को दिया अघ्र्य

 

जलाशय की जगह अस्थाई जलकुण्ड पर किया पूजन

चार दिवसीय कठिन व्रत का पारणा कल

By: Nandkishor Sharma

Published: 20 Nov 2020, 11:12 PM IST

जोधपुर. सूर्योपासना से जुड़ा प्रमुख लोकपर्व डाला छठ शुक्रवार को कोविड-19 की गाइडलाइन की पालना करते हुए सादगी से मनाया गया। सूर्यनगरी में चार दिवसीय छठ पूजन के तीसरे दिन बिहार, झारखंड, उत्तरांचल, उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश आदि राज्यों के प्रवासी लोगों ने बढ़ते कोरोना संक्रमण के कारण जलाशयों के घाट की जगह घरों के बाहर ही अस्थाई जलकुण्ड बनाकर छठ पूजन किया। निराहार-निर्जल व्रत रखने वाली व्रती महिलाओं ने घरों के बाहर जलकुण्ड पर परम्परागत लोक गीतों की स्वरलहरियों के बीच अस्तांचलगामी सूर्य को प्रथम अघ्र्य प्रदान किया। व्रती महिलाओं ने अस्त होते सूर्यदेव का पूजन व अघ्र्य प्रदान कर कंद-मूल, ऋतुफल, अदरक, ईख, आंवला, मूली व घरों में बना परम्परागत 'ठेकुआÓ प्रसाद चढ़ाकर परिवार में खुशहाली व समृद्धि की प्रार्थना की। शनिवार को उदित सूर्य को अघ्र्य देकर व्रत का पारणा किया जाएगा। रातानाडा कृष्ण मंदिर के पीछे अखिल भारतीय भोजपुरी समाज रातानाडा की ओर से छठ व्रती महिलाओं के लिए विशाल अस्थाई जलकुण्ड बनाकर पूजन की व्यवस्था की गई। समाज के अध्यक्ष बिरेन्द्र प्रसाद गुप्ता, उपाध्यक्ष विनोद कुमार प्रजापति आदि सदस्यों ने कोविड-19 की गाइडलाइन अनुसार पूजन व्यवस्था में सहयोग किया।

Nandkishor Sharma Desk
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