
राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस विशेष- ऑनलाइन खरीदारी में भी ठगे जा रहे उपभोक्ता
जोधपुर। बाजार से खरीदी गई वस्तुओं में पहले जब हम ठगे जाते थे तो टालने की आदत ज्यादा रहती थी। लेकिन समय के साथ अब लोगों में जागरूकता आई है और उपभोक्ता अपने अधिकारों को लेकर सजग हुए हैं। उपभोक्ता फोरम का उपयोग भी अच्छे से हो रहा है। लेकिन पिछले कुछ समय में ऑनलाइन मार्केट भी इसमें जुड़ गया है। एेसे में यहां भी ठगी की शिकायतें और वारदातें बढ़ी हैं। नए कानून में इसके लिए प्रावधान किए गए हैं, अब जरूरत इसके खिलाफ आवाज बुलंद करने की है।
लॉकडाउन और डिजिटल मार्केट
कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान डिजिटल मार्केट का ग्राफ तेजी से ऊपर गया। चाहे ग्रॉसरी हो या ऑनलाइन फूड। सभी में किसी न किसी प्रकार से ई-कॉमर्स कंपनियां जुड़ चुकी हैं। जो ऑर्डर दिया जाता है, उससे इतर यदि वस्तु डिलीवर होती है तो आवाज उठा सकते हैं।
हर माह २५ से ज्यादा मामले
ऑनलाइन के फेर में ठगे जाने के २५ से ज्यादा मामलो हर माह सामने आते हैं। कुछ लोग तो छोटी-बड़ी ठगी को नजरंदाज भी कर जाते हैं। जबकि घर की जरूरतों का २५ से ४० प्रतिशत हिस्सा ऑनलाइन मार्केट से पूरा होता है। इसीलिए ठगी का खतरा भी बढ़ा है।
सजगता जरूरी
हम तो सजग हैं और अपनी वस्तुएं चाहे ऑफलाइन खरीदें या ऑनलाइन उसका पूरा ध्यान रखते हैं। बाकी सभी से भी अपील है कि अपने अधिकार पहचानें
- राजेन्द्र बोराणा, प्रदेश प्रमुख, प्रदेश प्रमुख, भाजपा ग्रंथालय निर्माण प्रकल्प
युवा भी ध्यान रखें
युवा पिछले कुछ समय में ऑनलाइन खरीदारी ज्यादा कर रहे हैं। कई बार ठगी हो जाती है। एक सजग नागरिक होने के नाते इसको नजरंदाज नहीं करना चाहिए।
- निरंजनसिंह राठौड़, उद्यमी
ई-कॉमर्स भी दायरे में
कंज्यूमर प्रोजेक्शन एक्ट २०१९ उपभोक्ता हितों को बचाने के लिए दिशा में सार्थक प्रयास है। इसमें ई-कॉमर्स कंपनियों को भी निगरानी में रखने का प्रावधान है। इससे पहले ई-कॉमर्स कंपनियां बच निकलती थी।
- अविन छंगाणी, अधिवक्ता
खुद की सजगता जरूरी
खुद की सजगता सबसे ज्यादा जरूरी है। चाहे सामान मार्केट से लें या ऑनलाइन। अपने सामान का बिल लेना नहीं भूलते हैं, कमी हुई तो इसके लिए उचित जगह आवाज भी उठाते हैं।
- मनीष मुथा, पूर्व जिला मंत्री, भाजपा
एक्सपर्ट कमेंट
नए उपभोक्ता कानून बनने से उपभोक्ताओ के हितों का संरक्षण बेहतर तरीके से हो सकेगा। नए कानून में भ्रामक विज्ञापनों पर भी उपभोक्ता को कार्यवाही का अधिकार होगा। उपभोक्ता देश के किसी भी कंज्यूमर आयोग में मामला दर्ज करा सकेगा। ऑन लाईन और टेली शॉपिंग कम्पनियों को पहली बार शामिल किया गया है। खाने-पीने की चीजों में मिलावट होने पर जुर्माना एवं जेल का प्रावधान है। जिला मंच को अब उपभोक्ता आयोग कहा जाएगा। जिला स्तर पर कंज्यूमर फोरम में 1 करोड़ रुपए तक के केस दाखिल हो पाएंगे।
- लियाकत अली, सचिव, उपभोक्ता मार्गदर्शन समिति (उमस)
Published on:
24 Dec 2020 01:34 pm
