
माचिया बॉयोलोजिकल पार्क फेज-2 पर लटकी कोरोना की तलवार
जोधपुर. कायलाना के पास माचिया जैविक उद्यान फेज-2 में करोड़ों की लागत की पक्षी कक्ष की परियोजना पर अब कोरोना की तलवार लटकने लगी है। वनविभाग ने केन्द्रीय चिडिय़ाघर के निर्देशानुसार माचिया जैविक उद्यान फेज-2 विस्तार में पक्षी कक्ष के लिए करीब 5.36 करोड़ और पार्क को विकसित एवं समृद्ध करने के लिए फेज-2 की परियोजना तैयार कर वन मुख्यालय जयपुर को भेजी लेकिन शीर्ष अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया है। परियोजना में उम्मेद उद्यान से शिफ्ट पुराने जंतुआलय के पक्षियों के लिए विशाल एन्क्लोजर्स का निर्माण कार्य शामिल था। माचिया परियोजना फेज-2 को मंजूरी नहीं मिलने से मजबूरन पक्षियों को माचिया जैविक उद्यान में अस्थाई पिंजरों में रखा जा रहा है। सीजेडए निर्देशानुसार पक्षी कक्ष नहीं होने से पेलिकन्स, ऐमू, राजहंस, पहाड़ी तोते, तीतर, कुरजां, कॉमन कूट लव बड्र्स सहित कुछ पक्षियों की मौत तक हो चुकी है।
वन्यजीवों के जीवन से जुड़े ये भी कार्य अटके
माचिया जैविक उद्यान के वन्यजीवों की नियमित देखभाल व जांच के लिए स्थाई चिकित्सक के साथ वन्यजीव चिकित्सालय में अल्ट्रा सोनाग्राफी मशीन, पोर्टेबल सोनोग्राफी मशीन, सर्जरी उपकरण भी नहीं मिल पाए है। कोरोनाकाल में अधिकारी परियोजना बजट पर भी चुप्पी साधे है।
सीजेडए के मानदंड के अनुसार पक्षी कक्ष
हमने सीजेडए के मानदंड के अनुसार पक्षी कक्ष और एन्क्लोजर्स के डिजाइन तैयार करने कंसलटेंट तथा वन्यजीव चिकित्सालय के लिए आवश्यक उपकरण के लिए करीब 5 करोड़ 72 लाख का प्रस्ताव विभाग मुख्यालय और सीजेडए को मंजूरी के लिए भेजा है। बजट राशि विभिन्न मद में स्वीकृत होते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
महेश कुमार चौधरी, उपवन संरक्षक वन्यजीव जोधपुर
उद्यान निर्माण के प्रथम चरण में ऐसे हुए 32.30 करोड़ खर्च
कायलाना के पास माचिया जैविक उद्यान के लिए राज्य सरकार ने 2009 में 20 लाख रुपए दिए। वर्ष 2011 में स्टेट प्लान से 4 करोड़ की राशि जारी की गई। वर्ष 2012 में तेरहवें वित्त आयोग से 4 करोड़ व जापान की आरएफबीपी परियोजना-जायका -2 के तहत 3 करोड़ जारी किए गए। वर्ष 2013 में वित्त आयोग से 5 लाख एवं जायका-2 से तीन करोड़, वर्ष 2014 में वित्त आयोग से 9 लाख व जायका-2 से 9 करोड़ तथा वर्ष 2015 में जायका-2 से 8 करोड़ 96 लाख रुपए जारी किए गए थे।
Published on:
18 Jun 2020 11:46 pm
