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नाबालिग ने कहा- मैं गर्भवती हूं, कोर्ट ने 26 सप्ताह का गर्भ गिराने की अनुमति देने से किया इनकार

Minor Girl Pregnancy : पुलिस ने लडक़ी को ढूंढा, जो एक लडक़े बीरम राम के साथ थी। लडक़ी को 5 अप्रैल को कोर्ट के समक्ष पेश किया गया
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जोधपुर।

राजस्थान हाईकोर्ट ( rajasthan highcourt ) ने सोमवार को एक सोलह वर्षीय नाबालिग ( Minor Girl Pregnancy ) को 26 सप्ताह का गर्भ गिराने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। एमडीएम अस्पताल के तीन सदस्यीय स्त्रीरोग विशेषज्ञों के बोर्ड ने गर्भवती लडक़ी के मेडिकल परीक्षण की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की, जिसमें गर्भपात करवाने की स्थिति में जान को ख़तरा बताया गया। रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने माँग नामंज़ूर कर दी।

न्यायाधीश संदीप मेहता तथा न्यायाधीश अभय चतुर्वेदी की खंडपीठ ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में पेश प्रार्थना पत्र पर मेडिकल बोर्ड को लडक़ी का स्वास्थ्य परीक्षण करने के निर्देश दिए थे। बोर्ड को मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट (एमटीपी) के तहत इस संबंध में स्पष्ट राय देने को कहा गया था कि इस स्टेज पर गर्भपात की अनुमति दिया जाना सुरक्षित है या नहीं।

लडक़े बीरम राम के साथ रहना चाहती है लडक़ी
लडक़ी के पिता ने अपनी नाबालिग लडक़ी के लापता होने और पुलिस द्वारा उसे ढूंढने के प्रयास नहीं करने पर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। याचिका के विचाराधीन रहने के दौरान पुलिस ने लडक़ी को ढूंढा, जो एक लडक़े बीरम राम के साथ थी। लडक़ी को 5 अप्रैल को कोर्ट के समक्ष पेश किया गया, जहां उसने परिजनों के साथ घर जाने में अनिच्छा व्यक्त करते हुए प्रतिवादी बीरम राम के साथ जाने की इच्छा जाहिर की और यह भी कहा कि वह गर्भवती है।

कोर्ट ने भेजा बालिका गृह
कोर्ट ने पाया कि स्कूल सर्टिफिकेट के अनुसार लडक़ी नाबालिग है, लिहाजा प्रतिवादी पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध के लिए उत्तरदायी हो सकता है। कोर्ट ने लडक़ी को बालिका गृह भेजते हुए उसकी मेडिकल परीक्षण करवाने तथा गर्भ व प्रतिवादी का डीएनए प्रोफाइल टेस्ट करवाने के निर्देश दिए थे।

लडक़ी के 164 सीआरपीसी में बयान रिकॉर्ड करवाने को भी कहा गया। गत 16 मई को सुनवाई के दौरान कोर्ट के ध्यान में लाया गया कि डीएनए प्रोफाइल टेस्ट के लिए सैम्पल ले लिए गए हैं, लेकिन लडक़ी को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के आदेश के उसके परिजनों के साथ भेज दिया गया है। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए चाइल्ड वेलफेयर कमेटी से स्पष्टीकरण मांगा था और तब तक लडक़ी के गर्भ गिराने पर रोक लगा दी थी। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान गर्भ गिराने का प्रार्थना पत्र पेश किया गया, जिस पर कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड से रिपोर्ट तलब की थी।

फोटो - प्रतीकात्मक

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