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मोबाइल ऐप डाउनलोड करें तो अवेयर रहें, वरना गए काम से

  - जालसाजों ने ठगने का नया तरीका किया ईजाद- मोबाइल में हिडन वायरस पहुंचाकर कर रहे हैं खाते में सेंधमारी - ऐप बाइंडिंग से कर रहे ठगी
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मोबाइल ऐप डाउनलोड करें तो अवेयर रहें, वरना गए काम से

मोबाइल ऐप डाउनलोड करें तो अवेयर रहें, वरना गए काम से

जोधपुर। यदि आप अपने मोबाइल में कोई ऐप या गेम डाउनलोड कर रहे हैं, तो सावधानी बरतें। कहीं ऐसा न हो कि ऐप डाउनलोड करते ही खाते से रुपए निकलना शुरू हो जाए। साइबर अपराधियों ने लोगों के खातों में सेंध लगाने के नए-नए तरीके ईजाद कर लिए हैं। अब शहर में ऐप बाइंडिंग के माध्यम से साइबर ठगी के मामले सामने आए हंै। लोगों के पास न ओटीपी आया और न ही किसी ने खाते संबंधी जानकारी ली, इसके बावजूद भी रुपयों का ट्रांजेक्शन अन्य खातों में हो रहा है। लोगों की शिकायत भी रहती है कि हमने किसी को ओटीपी नहीं बताया फिर रुपए कैसे निकल गए। ऐप बाइंडिंग के जरिए यह खेल चल रहा है।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि हम मोबाइल में ऐप या गेम डाउनलोड करते समय कई गलतियां कर देते हैं, जिसका हमें पता ही नहीं चलता। गूगल प्ले स्टोर के अलावा किसी अन्य प्लेटफॉर्म से जल्दबाजी में ऐप डाउनलोड कर लेते हैं। बस यहीं से जालसाज अपना काम शुरू कर देते हैं। मोबाइल में ऐप डाउनलोड होते ही उसके साथ एक हिडन वायरस मॉलवेयर भी चला जाता है। इस वायरस से हमारा मोबाइल जालसाज के हाथों से कंट्रोल होना शुरू हो जाता है। जालसाज मोबाइल का पूरा डेटा चुरा लेता है। साथ ही वह मोबाइल में डाउनलोड ऑनलाइन पैमेंट ऐप के जरिए खाता से रुपए चुरा लेता है, जिसका पता तक नहीं चलता।

क्या होता है मॉलवेयर

मॉलवेयर एक ऐसा वायरस होता है जिसके माध्यम से यूजर का डिवाइस मसलन फोन, लैपटॉप और टैबलेट को रिमोटली एक्सेस कर लिया जाता है। उस डिवाइस में मौजूद सम्पूर्ण डाटा अपराधियों तक पहुंच जाता है। यहां तक कि डिवाइस का हार्डवेयर जैसे कि माइक्रोफोन, कैमरा और जीपीएस तक का एक्सेस अपराधी मॉलवेयर के माध्यम से ले लेते हैं।

यह हो सकता है नुकसान

इस मॉलवेयर के माध्यम से यूजर की कांटेक्ट डिटेल, उसके मैसेज, वॉट्सऐप चैट्स आदि चुराई जा सकती है।
- कीलोगर का उपयोग कर यह मॉलवेयर उसके यूपीआई/मोबाइल बैंकिंग पिन, नेटबैंकिंग पासवर्ड आदि बेहद संवेदनशील जानकारी साइबर अपराधी हासिल कर सकते हैं।

- यूजर की इजाजत के बिना उसकी तस्वीरें खींचीं जा सकती है, उसकी बातें माइक्रोफोन से रिकॉर्ड की जा सकती है।

- जीपीएस के माध्यम से उसकी लोकेशन पता लगाई जा सकती है।

बचाव के उपाय

गूगल प्ले स्टोर के अलावा किसी भी स्टोर से ऐप डाउनलोड न करें।
- थर्ड पार्टी ऐप का उपयोग करने से बचें।

- फोन में एन्टीमॉलवेयर डाउनलोड करें और उसे अपडेटेड रखें।

- फोन में फायरवॉल एक्टिव रखें एवं उसके लॉग्स चैक करते रहें।

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