9 अगस्त 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

नाजुक है गर्भावस्था का दौर, खुद की और गर्भस्थ शिशु की एहतियात से करें देखभाल

गर्भावस्था में बढ़ जाती है उच्च रक्तचाप और डायबिटीज की संभावना
2 min read
Google source verification
Delicate pregnancy period, take care of yourself and pregnant baby

नाजुक है गर्भावस्था का दौर, खुद की और गर्भस्थ शिशु की एहतियात से करें देखभाल

सोनोफेस्ट-2018 में जुटे देश के 150 सोनोलोजिस्ट

जोधपुर. गर्भावस्था हर महिला के लिए सुखद अनुभव है। लेकिन इस अवस्था में बदलते हार्मोंस प्रसूता के शरीर में कई बदलाव ला देते हैं। कई बार गर्भस्थ शिशु और प्रसूता को इसका नुकसान भोगना पड़ सकता है।

एक आंकलन के अनुसार गर्भावस्था में 40 प्रतिशत प्रसूताओं को उच्च रक्तचाप और 60 प्रतिशत महिलाओं को डायबिटीज होने की संभावना रहती है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को समय-समय पर चिकित्सक की सलाह लेते रहना चाहिए। ये बात शनिवार को शिकारगढ़ स्थित होटल में सोनोफेस्ट-2018 के तहत आयोजित तीन दिवसीय कांफ्रेंस के दूसरे दिन सोनोलोजिस्ट चिकित्सकों ने कही।


आयोजन सचिव डॉ. सुनील मेहता और कोषाध्यक्ष डॉ. राखी मेहता ने बताया कि सोनोफेस्ट में देश के 150 सोनोग्राफी चिकित्सक भाग ले रहे हैं। कार्यशाला प्रभारी डॉ. दलपतसिंह राजपुरोहित ने कहा कि सोनोफेस्ट की थीम गर्भस्थ शिशु की मां के पेट में देखभाल करने के बिंदुओं पर रही।

कांफ्रेंस के पहले दिन शुक्रवार को उम्मेद अस्पताल से वर्कशॉप का सीधा डेमो होटल में चिकित्सकों को दिखाया गया। कार्यक्रम में शहर के कई स्त्री एवं प्रसूति रोग चिकित्सक, रेडियोलोजिस्ट व एंड्रोकोलोजिस्ट चिकित्सकों ने हिस्सा लिया।

गर्भस्थ शिशु हृदय रोगी तो पकड़ में आ जाएगा

‘सोनोग्राफी तकनीक भी एडवांस हो गई है। ई-टेन मशीन के जरिए गर्भस्थ शिशु हृदय रोगी है तो पता चल जाता है और उसकी इको कार्डियोग्राफी तक हो जाती है। एक आकलन के अनुसार 1 हजार प्रसूताओं में से 10 के बच्चे को हृदय की छोटी-बड़ी बीमारी होती है। इनमें पांच को नवजात के जन्म लेने पर ठीक कर दिया जाता है। शेष पांच के लिए गर्भ समापन की सलाह दी जाती है।

डॉ. गिरीश पटेल, अहमदाबाद

सोनोग्राफी के कोई साइड इफैक्ट नहीं

‘सोनोग्राफी के कोई साइड इफैक्ट नहीं हैं। इसमें नवाचार के लिए कंप्यूटर, हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर इंजीनियर शोध में जुटे हैं। सोनोग्राफी गर्भवती महिलाओं और कई परिवारों के लिए वरदान है। ये प्रसूता व शिशु के हर खतरे को भांप सकती है।

- डॉ. अशोक खुराणा, नई दिल्ली

तीसरे और पांचवें माह में पकड़ में आ जाती है गर्भस्थ शिशु की विकृति

‘सोनोग्राफी के जरिए गर्भस्थ शिशु में कोई विकृति है तो उसकी पहचान संभव है। गायनोकोलॉजिस्ट अपना ट्रीटमेंट प्लान भी बदलते है। कई बार शिशु की किडनी डेमेज व ग्रोथ न होने की समस्याएं तीसरे-पांचवें माह में सामने आ जाती है। गर्भ की झिल्ली में पानी कम होने जैसी समस्याएं भी पकड़ ली जाती है। गर्भावस्था में डायबिटीज व उच्च रक्तचाप की समस्या हार्मोनल बदलाव के कारण होती है।

डॉ. प्रवीण, हैदराबाद

बड़ी खबरें

View All

जोधपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग