मानसून के कारण ट्रांजिशनल फेज में ही अण्डे देने लगी टिड्डी

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- गुलाबी टिड्डी पीली होने से पहले ही कर रही प्रजनन
- तापमान व नमी की अनुकूलता होने से आगामी दिनों में टिड्डी दलों का खतरा बढ़ा

By: Gajendrasingh Dahiya

Published: 13 Jul 2020, 11:55 PM IST

जोधपुर. मानसूनी मौसम के कारण रेगिस्तानी टिड्डी अब ट्रांजिशनल फेज में ही अण्डे देकर प्रजनन करने लग गई है। गुलाबी टिड्डी के झुंड में से कई टिड्डियां पूरी तरह से परिपक्व यानी पीला आने से पहले ही मैटिंग के पश्चिमी राजस्थान के जिलों जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर, चूरू, झुंझनंू और नागौर में अण्डे दे रही है। इससे आने वाले दिनों में बड़े दलों का खतरा बढ़ जाएगा।

11 अप्रेल के बाद अब तक पाकिस्तान से 78 टिड्डी दल भारत में प्रवेश कर चुके हैं। अब तक आने वाली टिड्डियां युवा यानी गुलाबी रंग की थी जो अनुकूल मौसम मिलने पर अब पीले रंग में ढल रही है। पाकिस्तान से नए टिड्डी दल में आ रही गुलाबी टिड्डी भारत में पहले से मौजूद पीली टिड्डी के साथ भी मैटिंग कर रही है। इससे अधिक प्रजनन की आशंका है।

भूरी, गुलाबी व पीली टिड्डी में अंतर
रेगिस्तानी टिड्डी एकाकी (सोलेटरी) और गठबंधन (ग्रीग्रेरियस) दोनों फेज में रहती है। एकाकी होने पर टिड्डी केवल अपनी भूख के अनुसार खाना खाती है। यह भूरे रंग की होती है जो शांत प्रवृत्ति रखती है। यह अकेले रहना पसंद करती है। कई बार टिड्डियों के इकठ्ठा होने पर इनमें दल बनाने की प्रवृत्ति आ जाती है जो विध्वंस करने में विश्वास रखती है। वर्तमान में ग्रीगेरियस टिड्डी है। अण्डे देने के बाद टिड्डी के निम्फ यानी हॉपर निकलते हैं जो वन से लेकर फाइव स्टार तक वृद्धि करते हैं। इसके बाद पंख आने पर गुलाबी रंग के ये टिड्डे उडऩे लायक हो जाते हैं। इनमें भरपूर ऊर्जा, अधिक दूरी व ऊंचाई तक उडऩे की क्षमता होती है। प्रजनन का मौसम आने पर गुलाबी टिड्डी का रंग धीरे-धीरे पीला होने लगता है जो केवल अण्डे देने की ही इच्छा रखती है। यह खाना कम खाती है।

पाक में दूसरी बार ब्रीडिंग

सामान्यत टिड्डी भारत-पाक बॉर्डर पर साल में एक बार समर ब्रीडिंग (जून से अगस्त) ही करती है। पाकिस्तान में परिस्थितियां अनुकूल मिलने और समुचित प्रबंधन नहीं करने पर टिड्डी ने सिंध की घाटी में स्प्रिंग ब्रीडिंग (मार्च-अप्रेल) भी कर दी जिसके कारण दलों की संख्या अधिक है।

90 प्रतिशत टिड्डी राजस्थान में
अब तक पाक से आए 99 फीसदी टिड्डी दलों ने राजस्थान से प्रवेश किया है। कुल टिड्डी नियंत्रण में से 90 प्रतिशत कार्यक्रम राजस्थान में हुआ है। अब तक 9 राज्यों, एक केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ व दिल्ली तक टिड्डी पहुंची है।

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‘कुछ टिड्डी अब ट्रांजिशनल फेज में ही अण्डे देने लग गई है। जोधपुर में ऐसे स्पॉट चिह्नित किए गए थे।’

वीरेंद्र सिंह सोलंकी, उप निदेशक, कृषि विभाग जोधपुर

Gajendrasingh Dahiya Reporting
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