प्रदेश के 48 हजार 466 मंदिर पुजारियों को सिर्फ तीन लाख ‘एन्यूटी’ का भुगतान

प्रचार-प्रसार व जानकारी के अभाव में देवस्थान विभाग से स्वीकृत बजट का नहीं हो रहा उपयोग

By: Jay Kumar

Published: 11 Jan 2021, 02:49 PM IST

जोधपुर. प्रदेश के विभिन्न जिलों के ४८ हजार ४६६ मंदिरों, मठों एवं धर्मस्थलों के पुजारियों को दी जाने वाली शाश्वत वार्षिकी राशि ‘एन्यूटी’ की जानकारी न होने से हजारों पुजारी परिवार लाभान्वित होने से वंचित हैं। वार्षिक शाश्वत राशि ‘एन्यूटी’ का निर्धारित प्रपत्र १२ क में किया जाता है। जागीर विभाग की ओर से निर्धारित वार्षिकी के भुगतान के लिए देवस्थान विभाग के बजट में राशि का प्रावधान स्वीकृत है। जागीर विभाग की ओर से स्वीकृत वार्षिकी के भुगतान के लिए देवस्थान विभाग की ओर प्रपत्र ख जारी किया जाता है। इसके लिए संबंधित जिले के कलक्टर (जागीर) , उपखंड अधिकारी, तहसीलदार के माध्यम से पुजारियों को राशि का भुगतान होता है।

क्या है शाश्वत वार्षिकी ‘एन्यूटी’
राजस्थान भूमि सुधार एवं जागीर पुनर्ग्रहण अधिनियम १९५२ के अनुसार मंदिरों, मठों और धार्मिक स्थलों की जागीरें पुनग्र्रहण किए जाने के फलस्वरूप मंदिरों के पुजारियों, महंतों, प्रबंधकों के क्लेम का निस्तारण कर वार्षिकी भुगतान ही ‘एन्यूटी’ कहलाता है।

डेढ़ दशक में कम हुए ६१२१ मंदिर
देवस्थान विभाग के बजट से वार्षिक एन्युटी प्राप्त प्रदेश के मंदिरों की संख्या २००४ में ५४ हजार ५८७ थी जो वर्तमान में घटकर ४८ हजार ४६६ हो चुके है। प्रदेश में ‘एन्यूटी’ पाने वाले मंदिरों में अजमेर में ९१६, अलवर १३६२, बारां १३४९, बाड़मेर ४८३, बांसवाड़ा ३०४, भरतपुर ६२१, भीलवाड़ा ४१८३, बीकानेर ३३७, बूंदी १७७७, चित्तौडग़ढ़ २८१५, चुरू ९९९, दौसा १५२६, धौलपुर २, डूंगरपुर २२४, जयपुर ४२५८, जैसलमेर २२१, जालोर १२०३, झालावाड़ २०१८, झूझुंनू १९८०, जोधपुर ११८८, करौली २०८३, कोटा २७८४, नागौर ३३८३, पाली २५०९, प्रतापगढ ७५९, राजसमंद १०९७, सवाई माधोपुर १३९९, सीकर २७४०, सिरोही २६९, टोंक १७६१ व उदयपुर में २०९६ धार्मिक स्थल शामिल है।

वर्ष २०१९-२० में स्वीकृत राशि
देवस्थान विभाग की ओर से २०१९-२० में प्रदेश के ४८ हजार ४६६ मंदिरों, मठों एवं धार्मिक स्थलों को दी जाने वाली शाश्वत वार्षिकी राशि के लिए १४.९८ लाख स्वीकृत किए गए लेकिन वितरण मात्र ३.१३ लाख ही किया गया। इससे पूर्व वर्ष २०१८-१९ में स्वीकृत ८ लाख राशि में से मात्र ५.२४ लाख का ही भुगतान हो पाया था। इसका प्रमुख कारण अधिकांश पुजारी मंदिर की ऑडिट रिपोर्ट व जांच की लंबी प्रक्रिया के कारण क्लेम नहीं कर पाते है। साथ ही ‘एन्यूटी’ राशि अत्यंत ही न्यून होना भी एक कारण है।

फार्म १२ बी होता है जारी
जिला कलक्टर के मार्फत विवरण फार्म संख्या १२ ए को भरने के बाद देवस्थान विभाग मुख्यालय उदयपुर को भेजा जाता है। दावेदार के पक्ष में रकम की स्वीकृति के बाद फार्म संख्या १२ बी जारी होता है जो संबंधित जिले के कोषाधिकारी के माध्यम से पुजारियों को भुगतान किया जाता है।
-राजेन्द्र भट्ट आयुक्त देवस्थान विभाग उदयपुर।

Jay Kumar
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