
पशुपालकों पर भारी पड़ रहा यहां के पशुचिकित्साकर्मियों के आपसी झगड़े
पीपाड़सिटी (जोधपुर). पंचायत समिति के साथीन गांव के राजकीय पशु चिकित्सालय में कर्मचारियों के बढ़ते आपसी झगड़े और उसमें प्रशासन के साथ विभागीय अधिकारियों का मूकदर्शक बने रहना ग्रामीण पशुपालकों के लिए भारी पड़ रहा हैं। गुरुवार को एक बार ड्यूटी पर तैनात पशु चिकित्साकर्मी आपस में ही किसी बात को लेकर उलझ गए और मारपीट तक कि नौबत आ गई, इस दौरान उपस्थित पशु पालकों के दखल के बाद ही मामला शांत तो हुआ लेकिन अस्पताल का माहौल तनाव से बाहर नही निकल सका।
सूत्रों के अनुसार सरकारी पशु अस्पताल में एक पशु चिकित्सा अधिकारी, दो पशुधन सहायक और एक पशुधन परिचारक हैं। इन एक-एक महिला व पुरुष पशुधन सहायक हैं। इनमें आए दिन आपसी विवाद होने से पशुपालकों को अपने पशुओं के इलाज के लिए इंतजार करना पड़ता हैं। पुरुष पशुधन सहायक पर तानाशाही पूर्व रवैया अपनाने को लेकर आरोप लगाए जा रहे है।
कहा जा रहा है कि महिला महिला पशुधन सहायक को उसके कार्यों में अनावश्यक दखल देने से वो परेशान हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बाहरी पशुधन सहायक के समय पर ड्यूटी से नहीं आने और मनमानी करने की आदत के साथ उसको मिल रहे राजनीतिक संरक्षण से अस्पताल की व्यवस्था भी चरमराने लगी हैं।
इसी बीच गुरुवार को ही यहां कार्यरत महिला चिकित्सा अधिकारी का तबादला जोधपुर करने के बाद आरोपी पशुधन सहायक की मनमर्जी ज्यादा बढऩे से अधीनस्थ कार्मिकों के लिए काम कर पाना लोहे के चने चबाने से कम नही हैं। गुरुवार को भी कार्मिकों में आपसी तू-तू मैं-मैं होने से पशुपालकों को इंतजार करना पड़ा।
पहले भी हुआ विवाद
साथीन के सरकारी पशु अस्पताल में कुछ महीनों पहले भी आपसी विवाद मारपीट तक जा पहुंचा, जिसमें परिचारक चोट से घायल भी हुआ। इसकी शिकायत उपजिला प्रशासन के साथ विभागीय अधिकारियों को भी दी गई, लेकिन आरोपी कार्मिक के विरुद्ध कोई कार्रवाई ना कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
इन्होंने कहा
मेरा तबादला गुरुवार को ही साथीन से जोधपुर होने पर मैं वहां से कार्यमुक्त हो गई।
-डॉ. सोनू टाक, पशु चिकित्सा अधिकारी।
-पशु चिकित्सा कर्मचारियों में आपसी झगड़े को लेकर अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं आई।
प्रेमदान रतनू, पुलिस थानाधिकारी, पीपाड़सिटी।
Updated on:
08 Mar 2019 11:48 am
Published on:
08 Mar 2019 11:45 am
