
डॉ. भाटी लोक चेतना के सजग प्रहरी: सुथार
जोधपुर. राजस्थानी भाषा, साहित्य तथा संस्कृति के उन्नयन में डॉ. नारायणसिंह भाटी के योगदान को कभी भी विस्मृत नहीं किया जा सकता। उनका सृजन कालजयी है। एक तरफ उन्होंने राजस्थानी डिंगळ शैली को आधुनिक रूप में प्रस्तुत किया तो दूसरी तरफ प्रकृति वर्णन को मानवीय संवेदनाओं के साथ उकेरा।
यह विचार डॉ. भंवरलाल सुथार ने राजस्थानी भाषा के ख्यातनाम कवि डॉ. नारायणसिंह भाटी की 27 वीं पुण्यतिथि पर साहित्यिक सांस्कृतिक समिति जै जै राजस्थान की ओर से ऑनलाइन आयोजित कार्यक्रम ‘लोकरंग’ में व्यक्त किए। संयोजक सीमा राठौड़ ने बताया कि राजस्थानी भाषा के रचनाकार डॉ. भवानीसिंह पातावत ने डॉ. नारायणसिंह भाटी द्वारा संपादित परम्परा के विशिष्ट अंको का विस्तार से विवेचन करते हुए उनके कुशल संपादन और एतिहासिक दृष्टि से किए गए साहित्यिक कार्यों को बताया। डॉ. पातावत द्वारा कवि नारायणसिंह भाटी की कविताओं का वाचन भी किया गया। गिरधर गोपाल भाटी ने कवि नारायण सिंह भाटी की सरलता, सादगी, समर्पण और मानवीय सेवा भाव से परिपूर्ण कार्यों का उल्लेख किया।
Updated on:
18 Apr 2021 05:07 pm
Published on:
18 Apr 2021 05:07 pm
