SILICOSIS---सिलिकोसिस रोकथाम में मददगार बनेगी ड्रिलिंग मशीन

- खानधारकों ने मशीन की टेस्टिंग के बाद पहली बार उपयोग किया शुरू

- पत्थर के साथ निकलने वाली धूल होगी नियंत्रित

By: Amit Dave

Published: 14 Aug 2020, 06:00 AM IST

जोधपुर।

जिले में खदानों से पत्थर निकलने के साथ फैल रही सिलिकोसिस बीमारी के नियंत्रण के लिए खुद सिलिकोसिस पीडि़त आगे आए है। सिलिकोसिस पीडि़तों ने पहल करते हुए सिलिकोसिस रोकथाम के लिए ड्रिलिंग मशीन का उपयोग शुरू किया है, जो पत्थर के साथ निकलने वाले धूल के कणों के नियंत्रित करेगी। मशीन के उपयोग से पहले इसकी जांच कराई गई। खनन के दौरान उपयोगकर्ताओं को मशीन में आई समस्याओं के बाद संशोधन कर अब इसे खानधारकों के उपयोग के लिए उतारा गया है। खानधारक कालूराम सोलंकी ने कोविड महामारी में जोधपुर में पहली धूल नियंत्रण मशीन का उपयोग कर सिलिकोसिस रोकथाम की पहल की है।

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प्रदेश में सिलिकोसिस आपदा श्रेणी में शामिल

प्रदेश में सिलिकोसिस को आपदा की श्रेणी में सम्मिलित करते हुए न्यूमोकोनिओसिस सिलिकोसिस नीति को अक्टूबर 2019 में लागू किया गया है। इस नीति के तहत प्रदेश के सभी प्राथमिक चिकित्सालयों से लेकर मेडिकल कॉलेज तक सिलिकोसिस जांच की सुविधा सुनिश्चित की गई है। सिलिकोसिस पीडि़तों के लिए 3 लाख रुपए व मरणोपरांत 2 लाख रुपए की सहायता राषि, 1500 रुपए मासिक पेंशन व अन्य सरकारी योजनाओं में प्राथमिकता दी गई हैं।

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सिलिकोसिस पीडि़तों द्वारा सिलिकोसिस रोकथाम के लिए अभियान चलाया जा रहा है। जिससे इस बीमारी से स्वतंत्रता प्राप्त की जा सके। यह ड्रिलिंग मशीन पत्थर निकालने के दौरान निकलने वाले धूल कणों को नियंत्रित करेगी।

राना सेनगुप्ता, प्रबंध न्यासी

खान मजदूर सुरक्षा अभियान

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Amit Dave Reporting
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