सुरपुरा बांध के चार हजार बीघा डूब क्षेत्र में अतिक्रमण की बाढ़


- न्यायालय की ओर से रोक के बावजूद धड़ल्ले से हो रहा निर्माण
- बहाव क्षेत्र का 120 फुट चौड़ा नाला सिकुडऩे के बावजूद अधिकारी मौन

By: Nandkishor Sharma

Published: 23 Oct 2020, 08:14 PM IST

जोधपुर. मंडोर से सुरपुरा बांध तक फैली 120 फुट चौड़ी और 8 किमी लंबी नागादड़ी व बालसमंद नहर के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण की बाढ़ सी आ चुकी है। बहाव क्षेत्र के नाले को जगह जगह से पाटकर आगोर क्षेत्र में धड़ल्ले से निर्माण कार्य जारी है। बहाव क्षेत्र मे आसपास के कई घरों का सीवरेज कनेक्शन तक नाले में जोड़ दिया गया है। सीवरेज के पानी से प्यास बुझाने वाले मवेशियों में कई तरह की बीमारियां हो रही है। करीब 120 फुट का ओवरफ्लो बहाव क्षेत्र दिनों दिन सिकुडऩे की शिकायत क्षेत्रवासियों की ओर से कई बार निगम अधिकारियों को लिखित और मौखिक की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मंडोर से सुरपुरा तक करीब 8 किमी लंबा बहाव क्षेत्र में यदि अतिक्रमण नहीं रोका गया तो तेज बारिश होने पर यहां पर तेलंगाना में हाल ही में हुए बारिश के बाद जैसे हालात हो सकते है। आसपास की कई रिहायशी कॉलोनियों में वर्तमान में थोड़ी सी तेज बारिश होने पर पानी का भराव हो जाता है।

प्राकृतिक बहाव क्षेत्र की लगातार अनदेखी
मंडोर क्षेत्र के इलाकों में पेयजल आपूर्ति एवं कायलाना पर दबाव कम करने के लिए 9 हजार 725 लाख की लागत से सुरपुरा रिजरवायर व डिग्गी निर्माण किया गया था। लेकिन सुरपुरा में प्राकृतिक रूप से आने वाले जल बहाव क्षेत्र की अनदेखी के कारण मंडोर से शुरू होकर सुरपुरा बांध तक सम्पूर्ण बहाव क्षेत्र के नाले को लगातार अनदेखा किया जा रहा है।

आठ से अटका हुआ है मामला
सुरपुरा बांध से जुड़े बरसाती नाले की महत्ता देखते हुए जेडीए ने वर्ष 2012 में करीब डेढ़ करोड़ की लागत से मरम्मत व बहाव क्षेत्र को विकसित करने जब रेवेन्यू तहसीलदार तथा भू प्रबंध अधिकारी से सीमांकन को कहा गया तो अधिकारियों ने मंडोर के प्रमाणित नक्शे गायब बताकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।

तेलंगाना जैसे हो सकते है हालात
न्यायालय की ओर से डूब क्षेत्र में धड़ल्ले से निर्माण पर रोक के बावजूद निर्माण कार्य चल रहा है। यदि इन्हें नहीं रोका गया तो भविष्य में तेज बारिश होने पर तेलंगाना जैसे हालात हो सकते है। मंडोर द्वितीय, बासनी मालियान और चैनपुरा पटवार मंडल के अधीन करीब चार बीघा डूब जमीन के खसरे इसमें शामिल है।
महेश गहलोत, संयोजक, यंग ब्लड युवा समिति मंडोर मगरा पूंजला।

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Nandkishor Sharma Desk
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