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55 की उम्र में भी साइक्लिंग के जूनून से देश-विदेश में बनाई पहचान

- जोधपुर की आयरन लेडी 25 हजार किमी का सफर कर चुकी तय- पेरिस में 92 घंटे में 1200 किमी साइक्लिंग रेस की पूरी

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55 की उम्र में भी साइक्लिंग के जूनून से देश-विदेश में बनाई पहचान

55 की उम्र में भी साइक्लिंग के जूनून से देश-विदेश में बनाई पहचान

जयकुमार भाटी/जोधपुर. बुलंद हौसले से उम्र का तकाजा नहीं किया जा सकता। अगर ललक हो तो फिर उम्र सिर्फ एक नम्बर बन कर ही रहती हैं। कुछ ऐसा ही जज्बा था 55 वर्ष की जोधपुर की शख्सियत रेणु सिंघी का। इनके साइक्लिंग के प्रति जोश ओर उत्साह के आगे युवा भी नतमस्तक है। इन्होंने फ्रांस में आयोजित एंड्यूरेंस राइड ‘पेरिस-ब्रेस्ट-पेरिस 2019 रेंडोनर’ को सफलतापूर्वक पूरा करने का गौरव हासिल किया हैं। खास बात यह है कि इस राइड में राजस्थान के कुल नौ प्रतिभागी शामिल हुए थे। जिसमें से केवल रेणु ही 1200 किमी की राइड पूर्ण कर सकीं। उनके साइक्लिंग के प्रति उत्साह, जुनून व जबरदस्त इच्छा शक्ति को देखते हुए इन्हें ‘आयरन लेडी’ भी कहा जाता हैं।

तीन साल में 25 हजार किमी का सफर
चार साल में आयोजित होने वाली सेल्फ सपोर्टिंग एंड्यूरेंस राइड ‘पेरिस-ब्रेस्ट-पेरिस 2019 रेंडोनर’ का पिछले वर्ष 19वां एडिशन था। यह पेरिस से शुरू होकर 600 किलोमीटर दूर बार्डर पर स्थित बे्रस्ट होते हुए वापस पेरिस पहुंचती हैं। इसमें प्रतिभागियों को 90 घंटे में कुल 1200 किलोमीटर साइक्लिंग की टास्क पूरी करनी होती है। रेणु ने 92 घंटे में इसे पूरा किया। रेणु ने जोधपुर व जयपुर के साइकिल क्लब को ज्वाइन कर लोकल लेवल पर होने वाले 200, 300, 400 व 600 किमी के चैलेंज को भी पूरा किया। रेणु ने अभी 15 जुलाई से 15 अगस्त 2020 तक कोटा साइक्लिंग चैलेंज में 1750 किलोमीटर साइक्लिंग कर प्रतियोगिता में भाग लिया हैं। इसमें 50 किलोमीटर प्रतिदिन साइक्लिंग की गई। जिसमें पांच दिन में तो सौ किलोमीटर साइक्लिंग करनी थी। वे 92 घंटे में 1250 किलोमीटर साइक्लिंग करने वाली राजस्थान की पहली महिला हैं। रेणु पिछले तीन सालों में 25 हजार किलोमीटर से अधिक साइक्लिंग कर चुकी हैं।

परिवार ने पहले टोका, फिर मिला साथ
रेणु ने बताया कि उनके व्यवसाय पति शशिकांत सिंघी व दो बेटे-बहू ने इस उम्र में साइक्लिंग करने पर पैरों व घुटनों में दर्द होने की शिकायत करते हुए पहले टोका, लेकिन साइक्लिंग के प्रति मेरा जज्बा व जुनून देखते हुए फिर उन्होंने मुझे पूरा सपोर्ट भी किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को यह सोचकर नहीं बैठना चाहिए कि हम महिला है। महिला अपने जुनून व हौसले से पुरुषों के बराबर हर काम को पूरा कर सकती हैं। उसके लिए उम्र भी आडे नहीं आती। बस लक्ष्य को प्राप्त करने का जज्बा होना चाहिए।

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