
जीरे ने फिर बढ़ा दी है किसानों की चिंता, इन फसलों की हालत भी लडख़ड़ाने लगी है
मथानिया/जोधपुर. मसाला फसल जीरा एवं अन्य कृषि जिंसों के भावों में भारी गिरावट आ गई है। इसके चलते किसान अपनी फसल को औने-पौन दामों पर बेचने को मजबूर हो रहा है। मथानिया कृषि क्षेत्र के तीन दर्जन से अधिक गांवों में किसान हजारों हैक्टेयर भू भाग पर कृषि कार्य करते हैं। इस इलाके में बड़ी मात्रा में रायड़ा, जीरा, अरंडी, कपास, लहसुन, मूंगफली, गाजर और ग्वार फसलें पैदा होती है। लेकिन इन फसलों का बाजार भाव दिनों-दिन गिरता जा रहा है। प्रमुख मसाला फसल जीरे के भाव इन दिनों औंधे मुंह गिर चुके हैं।
आमतौर पर 17 से18 हजार रुपए प्रति क्ंिवटल बिकने वाला जीरा अब 12 से13 हजार रुपए प्रति क्ंिवटल तक आ गया है। इससे किसानों को प्रति क्ंिवटल चार से पांच हजार रुपए का नुकसान हो रहा है। साथ ही जीरा का निर्यात बंद सा हो गया है। किसान नेता विनोद डागा ने बताया कि जीरे के साथ ही अरंडी के भावों में भारी गिरवाट आई है। अरंडी कुछ महिनों में ही 33 से 35 रुपए प्रतिकिलो तक आ चुकी है। रायड़े की बंपर पैदावार की उम्मीद जरूर बंधी है, लेकिन रायड़े के भाव भी 44 से 45 रुपए प्रति किलो से गिरकर 36 से 37 रुपए तक आ गए हैं।
कपास, गजार, ग्वार, इसबगोल के भावों में भी गिरवाट के चलते किसानो की आर्थिक हालात बुरी तरह से लडख़ड़ा चुकी है। खेत खलिहानो में नई फसलों की आवक तैयार हो चुकी है। ऐसे में बंपर पैदावार के चलते भाव और कम होने की संभावना जताई जा रही है। केन्द्र व राज्य सरकार की नीतियों के चलते जब-जब भी फसल पककर किसान के पास आती है तब-तब बाजार भावों में गिरावट अवश्य आती है। ऐसे में किसानो को उसकी उपज का वाजिब दाम नहीं मिल पाता है। ऐसे में किसान औने-पौने दामों पर अपनी फसल साहुकारों के हाथों बेचने को मजबूर हो जाते हैं।
Published on:
24 Feb 2020 12:02 pm
