
प्याज की बुवाई में जुटे किसान, उन्नत खेती के तरीके सुझा रहा है कृषि विभाग
मथानिया. मथानिया कृषि इलाके में किसान इन दिनों प्याज की बुवाई में जुटे हैं। खेतों में समूह के रूप में महिलाएं प्याज पौध की बुवाई में जुटी हैं। वहीं कृषि विभाग ने प्याज फसल की उन्नत खेती के तरीके सुझाए है। मथानिया कृषि इलाके के भैंसेर कोटवाली, भैंसेर चावण्डियाली, उम्मेदनगर, नेवरा रोड, बिगमी, नेवरा गांव, चावण्डियाली, किरमसरिया, माण्डियाई, गोपासरिया, जुड़, उम्मेदनगर, खारडा मेवासा समेत तीन दर्जन से अधिक गांवों में किसान हजारों हेक्टेयर भू-भाग पर प्याज की खेती करते हैं।
यहां के प्याज का रंग व स्वाद अच्छा होने के कारण देश की प्रमुख मण्डियों में इसकी जोरदार मांग रहती है। गांवों में किसान इन दिनों सुबह से शाम तक प्याज के लिए क्यारियां बनाने, देशी खाद डालने, पौध उखाडऩे, प्याज पौधे की रोपाई के कार्यों मे जुटे हैं। प्याज बुवाई की मुख्य सीजन के साथ गाजर की फसल निकालने के कारण किसानों को अब मजदूरों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। मजदूरी देने के बाद भी पर्याप्त मजदूर नहीं मिल पाते है। कृषि विभाग ने सुझाए उपायसहायक कृषि अधिकारी ओमप्रकाश चौधरी ने बताया कि प्याज के लिए लवणीय व क्षारीय भूमि नहीं होनी चाहिए।
प्याज में 250 किलो जिप्सम का प्रति हैक्टेयर प्रयोग करें। इससे किसान चमकदार प्याज पैदा कर सकेंगे। प्याज में गुलाबी जड़ गलन रोग के नियंत्रण के किसान पौध रोपाई के समय 1 ग्राम कार्बेण्डोजियम, 50 डब्ल्यूपी प्रतिलीटर घोल बनाकर प्याज पौध में घोल में थोडी देर डूबोकर रोपें। वहीं 50 किलो नत्रजन, 50 किलो फास्फोरस तथा 100 किलो पोटाश खाद प्रति हैक्टैयर के हिसाब से दें। प्याज में कतार से कतार की दूरी 15 सेमी, पौधे से पौधे की दूरी 10 सेमी होनी चाहिए।
Published on:
12 Jan 2020 05:00 pm
