
किसानों को रास आ रही चने की खेती
बिलाड़ा. इस मौसम के मिजाज ने किसानों को फसल चक्र में बदलाव के लिए मजबूर कर दिया अक्टूबर व नवंबर में बारिश का दौर बना रहने से किसान वंचित रहने गेहूं व सरसों की बुवाई नहीं कर सके। एेसे में कई किसान चने की खेती की ओर रुख कर रहे है। जो किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है। वही कई किसान अपने खेत मे सरसों व गेहूं की खेती में भी जुटे है।
किसानों का कहना है कि चना कम लागत में अच्छा मुनाफा देने वाली फसल है। इसका प्रति बीघा का उत्पादन 5 से 6 क्विंटल तक रहता है खुले बाजार में चने की काफी मांग होने से यह पांच हजार रुपए प्रति क्विंटल तक बिक जाता है। केंद्र सरकार ने चने का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4825 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है। ऐसे में किसान एक बीघा में पच्चीस हजार से तीस हजार रुपए फसल ले सकता है।
खाद व पानी की बचत
चने के उत्पादन में किसानों को बीज के अलावा 12 से 15 किलो डीएपी खाद की जरूरत होती है, यह रबी की ऐसी फसल है जो एक सिंचाई में भी हो जाती है और मावठ फसल के लिए उत्पादन बढ़ाने में कारगर होती है। जिन किसानों के पास सिंचाई की व्यवस्था रहती है वह दो बार भी सिंचाई कर सकते हैं और चने की फसल ले सकता है। निप्र
Updated on:
16 Nov 2019 11:21 pm
Published on:
16 Nov 2019 11:08 pm
