
आखिर पिता ने थामी तीनों नौनिहालों की अंगुली
जोधपुर। दस दिन नारी निकेतन में गुजारने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट की एक खंडपीठ के समक्ष पेश की गई विवाहिता ने बुधवार को फिर दोहराया कि उसने पति से इतर एक अन्य व्यक्ति से स्वैच्छिक संबंध स्थापित किए हैं और वह किसी अवैध कारावास में नहीं है। कोर्ट ने महिला को अपने तीन बच्चों में से किसी एक को गोद लेने की गुजारिश भी की, लेकिन वह नहीं मानी। इस बार पिता ने पितृत्व दिखाते हुए तीनों नौनिहालों के पालन-पोषण की इच्छा जताई।
न्यायाधीश संदीप मेहता तथा न्यायाधीश देवेन्द्र कच्छवाहा की खंडपीठ ने विवाहित महिला को अपनी इच्छा के मुताबिक जाने की स्वतंत्रता दे दी, पर मानवीय दृष्टिकोण दिखाते हुए तीन बच्चों के संरक्षण और कल्याण के लिए अपेक्षित कदम उठाने को अतिरिक्त महाधिवक्ता फरजंद अली को निर्देशित किया। दरअसल, जोधपुर के बनाड़ निवासी एक पति ने यह कहते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की कि उसकी पत्नी को ओसियां तहसील निवासी राजूराम ने जबरन बंधक बना रखा है। इस पर 1 मार्च को महिला को पुलिस ने खंडपीठ के समक्ष पेश किया, तब विवाहित महिला ने न केवल अपने पति के साथ जाने से इनकार कर दिया, बल्कि तीन बच्चों की जिम्मेदारी लेने से भी मना कर दिया, वहीं पति ने भी उस दिन तीन नाबालिग बच्चों की देखभाल को लेकर असमर्थता जता दी थी। दस दिन नारी निकेतन में काउंसलिंग के बाद महिला को बुधवार को दुबारा खंडपीठ के समक्ष पेश किया गया, जहां वह अपने पूर्ववर्ती बयान पर कायम रही। हालांकि, पिता ने इस बार सात व पांच वर्ष की दो बेटियों सहित डेढ़ साल के बेटे की पालन-पोषण के लिए हाथ बढ़ाया। खंडपीठ ने अतिरिक्त महाधिवक्ता को कहा कि सामाजिक अधिकारिता विभाग के संबंधित अधिकारी को तीनों बच्चों की देखभाल और संरक्षण के लिए उचित योजना के तहत लाभान्वित करने को निर्देशित किया जाए। कोर्ट ने कहा, हम महसूस करते हैं कि किशोर न्याय अधिनियम के तहत तीनों बच्चों को उचित देखभाल व संरक्षण की दरकार है। खंडपीठ ने हालांकि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका निस्तारित कर दी, लेकिन 8 अप्रैल को बच्चों के लिए किए गए प्रयासों की पालना रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
Published on:
11 Mar 2021 08:04 pm
