
नगर निगम की नहीं खुल रही नींद, बाजार की गलियों में खुले आम चल रही है तबाही की भट्टियां
जोधपुर . त्रिपोलिया बाजार की तंग गलियों में कपड़े की दुकानें खतरे के साये में हैं। अनहोनी की स्थिति में छोटी-छोटी गलियों में दमकल व एंबुलेंस का घुसना भी नामुमकिन है। बड़ी घटना के वक्त लोगों की जान भी खतरे में पड़ सकती है। यहां घरों के नीचे कपड़े के प्रतिष्ठान चलते हैं, जो वैध नहीं हैं। इनमें कई तो वर्षों पुरानी दुकानें हैं। ऐसे में नगर निगम के सारे-नियम कायदे यहां ताक पर रखे नजर आते हैं।
एक-दूसरे से सटी हैं दुकानें
त्रिपोलिया के आसपास की छोटी गलियों में पग-पग पर कपड़े की दुकानें हैं। शॉर्ट सर्किट की स्थिति में आसपास की सारी दुकानें कभी भी स्वाह हो सकती है। सभी दुकानें एक-दूसरे से सटी हुई हैं। सभी दुकानें रहवासीय भवनों के नीचे किराए पर दी हुई है। इनका भी कोई हिसाब-किताब नहीं माणक चौक से तूरजी का झालरा क्षेत्र व आस-पास चल रहे गेस्ट हाउस नगर निगम की सूची से दूर हैं, क्योंकि नगर निगम में इनका कोई हिसाब-किताब नहीं है। पूर्व में जयपुर की तर्ज पर जोधपुर में भी गेस्ट हाउस को लेकर नियम-कायदे बनाए गए थे, वे अभी तक लागू नहीं हुए हैं। हालांकि इन गेस्ट हाउस में बिजली व पानी के कनेक्शन कॉमर्शियल हैं, लेकिन जगह कॉमर्शियल नहीं है। इन क्षेत्रों में भी बिना अनुमति के व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इसी तरह गूंदी मोहल्ला व नवचौकिया इलाके में भी बिना नियम-कायदे के गेस्ट हाउस हैं। कई लोगों ने गेस्ट हाउस के लिए दो-तीन मंजिला इमारतें बिना फायर सेफ्टी सिस्टम के खड़ी कर दी हैं। इनमें से अधिकतर अवैध निर्माण के मामले वार्ड निरीक्षक स्तर पर ही दब जाते हैं।
तंग गलियों में सुलग रही भट्टियां
घासमंडी क्षेत्र की तंग गलियों में भी नमकीन व मिठाइयों की दुकानें हैं। मिठाई व नमकीन के व्यापारी सड़क पर भट्टियां लगाकर बैठे हुए हैं। ऐसे में आग की घटना का खतरा हर वक्त यहां बना रहता है। दिवाली सीजन में भट्टी से चंद कदम की दूरी पर ही पटाखों की दुकानें खोल दी जाती हैं। इन मामलों में भी नगर निगम चुप्पी साधे रहता है।
Published on:
04 Jun 2018 02:59 pm
