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खाद्य तेलों में महंगाई का तड़का, बिगड़ा खाने का जायका

- 20 दिन में प्रति टिन में हुई 150 रुपए की बढ़ोतरी - रसोई में घुसी महंगाई- खाद्य तेलों के साथ दालें-सब्जियों के भाव भी आसमान पर
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जोधपुर

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Amit Dave

Jul 24, 2021

खाद्य तेलों में महंगाई का तड़का, बिगड़ा खाने का जायका

खाद्य तेलों में महंगाई का तड़का, बिगड़ा खाने का जायका

जोधपुर।

बेकाबू हुई महंगाई को लेकर देशभर में हल्ला मच रहा है। आम आदमी महंगाई की मार झेल रहा है। इसका असर रसोई तक पहुंच गया है। दैनिक उपयोग की खाद्य सामग्री के दामों में बेहताशा बढ़ोतरी से 'गृहलक्ष्मीÓ (गृहणियों) का रसोई का बजट गड़बड़ा गया है। खाद्य तेलों में बीस दिनों में 10 से 15 रुपए प्रति किलो की तेजी आई है। व्यापारियों का कहना है कि अन्तरराष्ट्रीय बाजार में चल रही उथल पुथल के कारण खाद्य तेलों में तेजी आई है। लगातार पेट्रोल व डीजल के भावों में वृद्धि भी महंगाई का एक कारण है।

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150 रुपए तक बढ़ गए तेल के भाव

खाद्य तेल व्यापारियों के अनुसार पॉम तेल के इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने से जो खाद्य तेलों के भाव घटे थे, वे पुन विदेश में पॉम तेल के भाव बढऩे से उच्चतम स्तर पर आ गए। वहीं मानसून में देरी की चलने से भारत में सोयाबीन उत्पादक मध्यप्रदेश, राजस्थान आदि राज्यों में उत्पादन प्रभावित हुआ है, इससे भी भावों में तेजी आई है। लॉकडाउन के बाद खाद्य तेलों के भाव बढऩा शुरू हुए, जो अब तक जारी है। मूंगफली, सोयाबीन व सरसों तेल की बात करें तो पिछले 20 दिनों में प्रति टिन 150 रुपए या प्रति किलो 10-15 रुपए भाव बढ़े है।

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खाद्य तेल भाव प्रति टिन रुपए में

तेल----- लॉकडाउन के पहले--- वर्तमान भाव

सोयाबीन-- 2100-2150--- 2325-2400

मूंगफली--- 2100- 2125--- 2200-2300

सरसो--- 2150--2175--- 2350--2500

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दालें भी ऊंचाई पर

दाल ब्रोकर लादूराम पारीक ने बताया कि समय पर फसलों का न होना व फसलों का कमजोर होने से दालों के भावों में तेजी आई है। सरकार की स्टॉक लिमिट के कारण भी दालें महंगी हो रही है।

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सब्जियों के भाव बढऩा शुरू, आगे और बढ़ेंगे

जोधपुर फल सब्जी मंडी व्यापारी व विक्रता यूनियन सीटू के अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह परिहार लॉकडाउन में बंद की वजह से सब्जियों का व्यापार नहीं हुआ। अब देश में बारिश का सीजन चल रहा है, इस वजह से सब्जियों की आवक कम हो गई है और सब्जियों के भावों में तेजी आना शुरू हो गई है, सब्जियों के भाव आने वाले दिनों में और तेज होंगे।

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दालों के होलसेल भाव

दाल----- -- प्रति किलो रुपए में

दाल चना ---- 59-62

मूंग मोगर ------- 80-85

मूंग दाल ---------- 72-77

उड़द दाल -------- 85-95

उड़द मोगर --------- 90-100

काबली चना ---------90-100

मोठ मोगर --------- 98-100

अरहर दाल -- -------- 90-100

मसूर मल्का --------- 75-76

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सब्जियों के रिटेल भाव

सब्जी--------- प्रति किलो रुपए में

आलू------------- 15-18

प्याज------------ 25-30

लहसुन---------- 70-100

गोभी-------------- 50-60

पत्ता गोभी---------- 35-40

टिंडी------------- 50-60

काचरा------------ 10-25

लोकी------------- 20-30

टमाटर----------- 35-40

मिर्च------------- 40-60

भिण्डी------------ 55-60

खीरा------------- 35-40

बैगन-------------30-40

तर काकडी------- 30-40

ग्वार फली-------- 50-60

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वर्तमान हालात को देखते हुए तेलों के भाव इसी स्तर पर रहेंगे। देश में करीब 70 प्रतिशत खाद्य तेल आयात होता है, ऐसी स्थिति में जब तक विदेशी तेल सस्ता नहीं होगा, सरकार आयात ड्यूटी नहीं घटाएगी, तब तक खाद्य तेल की कीमतों में कमी नहीं आएगी।

चन्द्रप्रकाश मूथा, घी-तेल व्यापारी

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महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। किराणा, घी-तेल, सब्जियां आदि के भाव बढ़ गए है। सरकार को रोजमर्रा की वस्तुओं के बढ़ते भावों पर नियंत्रण करना चाहिए।

श्याम सोनी

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घी-तेल, सब्जियां, किराणा सबके भाव बढऩे से रसोई का बजट बिगड़ गया है। लॉकडाउन के कारण वैसे भी आम आदमी की हालत खराब है। लॉकडाउन के बाद रोजमर्रा की चीजें महंगी हो गई है।

रेशमबाला

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