
मित्रता की मिसाल : साथ पढ़े, साथ खेले और फिर आगे बढ़े, आज भी वैसा ही याराना
जोधपुर.
इसको अजीब संयोग ही मान सकते हैं कि बचपन के तीन दोस्त साथ खेले, पढ़े और सालों बाद एक ही जगह पर अच्छे मुकाम पर पुन: मिल जाएं। ये तीन दोस्त है, डॉ. एसएस राठौड़, डॉ. इन्द्रदेव आर्य और डॉ. सुनील बिस्ट। तीनों वर्तमान में जोधपुर शहर में तीन प्रमुख पदों पर आसीन हैं।
तीनों ही मित्र वर्ष 197२-73 में चौथी व पांचवीं कक्षा तक जोधपुर के केन्द्रीय विद्यालय-1 (एयरफोर्स) में साथ पढ़े थे। चूंकि सभी का जोधपुर में साथ पढऩा भी संयोग ही था। तीनों के पिता सरकारी जॉब में यहां तैनात थे। दो मित्रों के पिता के तबादले होते गए तो साथी बिछड़ते गए। तीनों बिछड़े साथियों की जोधपुर वापसी हुई, तो शहर के प्रमुख तीन पदों पर आसीन होकर आए।
तीनों को बचपन में साथ खेलने, पढऩे और क्लास बंक कर लंच करने और बचपन में बदमाशीकरने की यादें आज भी याद है। वे जब भी सपरिवार मिलते हैं तो इनकी बातें सुन इनके परिवार के सदस्य भी गदगद हो जाते हैं। तीनों मित्रों का मानना है कि जीवन में अच्छी मित्रता बेहद जरूरी है। वे कहते हैं कि असली मित्रता उनके जमाने में ही थी। अब तो मोबाइल आने के बाद फेसबुक-व्हाट्सऐप पर ई-मित्रता का दौर आ गया है।
डॉ एस. एस. राठौड़
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. शैतानसिंह राठौड़ मूलत सिरोही जिले शिवगंज के बडग़ांव के निवासी हैं। इनके पिता एनएस राठौड़ फौज में कर्नल थे। पिता के ट्रांसफर के साथ उनका स्थान बदलता गया। जन्म दिल्ली में हुआ, लेकिन प्राथमिक शिक्षा जोधपुर में हुई। कक्षा 4 व 5 की पढ़ाई केवी-1 एयरफोर्स में की। 18 साल बाद वर्ष 1993 में डॉक्टर के रूप में जोधपुर वापसी हुई। तब से जोधपुर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर रहते हुए वर्तमान में कॉलेज में प्रिन्सीपल की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
डॉ. इन्द्रदेव आर्य-
केन्द्रीय शुष्क वन अनुसंधान संस्थान-आफरी के निदेशक डॉ. इन्द्रदेव आर्य का जन्म जोधपुर के उम्मेद अस्पताल में हुआ। मूल जयपुर निवासी आर्य के पिता डॉ. एससी आर्य जेएनवीयू में बॉटनी डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष रहे। एमएससी तक पढ़ाई जोधपुर में की और फिर पोस्ट डॉक्टरेट की पढ़ाई के लिए स्वीडन व इंग्लैण्ड में रहे। करीब 25 साल बाद जोधपुर लौटे। दस साल से ऑफरी में पदस्थापित है।
डॉ. सुनील कुमार बिस्ट-
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुनीलकुमार बिस्ट का जन्म भी उम्मेद अस्पताल में हुआ। इनका परिवार मूलत: उत्तराखण्ड निवासी है। पिता रेलवे नौकरी में थे। इसलिए जोधपुर आ गए, यहां रेलवे कॉलोनी में रहते थे। एमबीबीएस तक की पढ़ाई जोधपुर में की। हॉकी के अच्छे खिलाड़ी रहे हैं। उच्च शिक्षा व डॉक्टरी की नौकरी के कारण 25 साल बाद सीएमएचओ के रूप में पदस्थापित होकर जोधपुर लौटे।
इतने शैतान थे बचपन में
- 1972-73 में तीनों मित्र केवी-1 एयरफोर्स में पढ़ते थे। तीनों क्लास बंक कर लंच करने जाते। बबूल की झाडिय़ों के बीच छिपकर लंच करते थे।
- वे उम्र में जरूर छोटे थे, फिर भी साइकिल कैंची चलाकर स्कूल जाते थे।
- बरसात के समय बाहर से मेंढ़क पकड़ लाते और अन्य विद्यार्थियों के बैग में डाल देते थे।
- इनकी शैतानियों पर कई बार क्लास टीचर बाहर खड़ा करते या मुर्गा तक बना देते थे।
Published on:
05 Aug 2018 01:15 am
