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‘असंवैधानिक नीतियों के विरोध में हड़ताल मौलिक अधिकार, इसमें कटौती मंजूर नहीं’

अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू करने की मांग, समितियों के गठन के लिए चेयरमैन अधिकृत
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'Fundamental right to strike against unconstitutional policies

first meeting of the Bar council of Rajasthan held at jodhpur on sept.16/2016

जोधपुर

नव निर्वाचित बार कौंसिल ऑफ राजस्थान की साधाराण सभा की रविवार को आयोजित पहली बैठक में बार कौंसिल ऑफ इंडिया की ओर से सोमवार को प्रस्तावित विरोध दिवस का सर्वसम्मति से समर्थन किया गया। बैठक में कहा गया कि सरकार की असंवैधानिक नीतियों के विरोध में हड़ताल करना वकीलों का मौलिक अधिकार है। इसमें किसी तरह की कटौती मंजूर नहीं है।


हाईकोर्ट परिसर स्थित कौंसिल के सभा भवन में चेयरमैन सुशील शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में उपाध्यक्ष जीडी बंसल, बीसीआइ सदस्य सुरेशचंद्र श्रीमाली सहित 24 सदस्य उपस्थित थे।

कौंसिल के सचिव राजेन्द्रपाल मलिक के अनुसार बैठक की शुरुआत में अध्यक्ष शर्मा और सदस्यों ने औपचारिक परिचय के बाद सभी मतदाता सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए वकीलों के कल्याण के लिए कार्य करने का संकल्प दोहराया। सभी सदस्यों ने विभिन्न समितियों में सदस्यों व ट्रस्टियों की नियुक्ति के लिए अध्यक्ष को अधिकृत किया।

बैठक में केरल के बाढ़ पीडि़तों की सहायता के लिए मुख्यमंत्री सहायता कोष में ढाई लाख रुपए भेजने का निर्णय किया गया। इसके लिए प्रत्येक नव निर्वाचित सदस्य से दस हजार रुपए एकत्र किए जाएंगे। सदस्य जगमालसिंह चौधरी की ओर से पेश वकीलों की बीमारी, मृत्यु व सेवानिवृत्ति पर दी जाने वाली राशि बढ़ाने और पेंशन व बीमा योजना लागू करने, डॉ. सचिन आचार्य व सुनील बेनीवाल की ओर स वकीलों की सुरक्षा के लिए अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू करने और कौंसिल की अधिकांश सेवाओं को ऑन लाइन करने का प्रस्ताव पारित किया गया।

एडहॉक पदोन्नति पर एतराज

बैठक में एसीजेएम व सीजेएम को एडीजे पद पर एडहॉक पदन्नति पर ऐतराज उठाते हुए पहले वकील कोटे से भर्ती करने व बाद में पदोन्नति करने, आरजेएस भर्ती के लिए अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष करने,अधिवक्ताओं की फीस निर्धारण के लिए सिविल रूल्स जनरल में आवश्यक सशोधन करने और राजस्वमंडल सदस्यों में वकील कोटे के सदस्यों की आयु सीमा 54 से घटा कर 45 वर्ष करने की मांग की गई।


दो नई एसोसिएशन को मान्यता

बैठक में बार एसोसिएशन नीमराना (अलवर) और गुडामालानी (बाड़मेर) को मान्यता प्रदान की गई। जबकि अधिवक्ताओं के खिलाफ प्राप्त शिकायतों पर विचार कर उचित निर्णय लिया गया।

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