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ग़ायकी के ‘रसराज ने जोधपुर में कई बार बिखेरा था सुरों का जस

  जोधपुर के उस्ताद सुलतान खां के साथ से कई कार्यक्रम में हुए थे शामिल
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ग़ायकी के 'रसराज ने जोधपुर में कई बार बिखेरा था सुरों का जस

संगीत के कार्यक्रम के दौरान तबला वादन करते पंडित जसराज का दुर्लभ फोटो - पत्रिका

नंदकिशोर सारस्वत

जोधपुर. सप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित जसराज के निधन की खबर से जोधपुर में भी शोक की लहर छा गई। उनका जोधपुर से दीर्घकालीन जुड़ाव रहा है। गायकी के रसराज बनने से पहले भी उनका लम्बा समय यहां बीता और बाद में यहां बनी रिश्तेदारी ने उन्हें यहां से अंत तक जोड़े रखा। उन्होंने यहां कई कार्यक्रमों में प्रस्तुतियां देकर सुरों का जस बिखेरा था।
उम्मेद भवन पैलेस में मार्च 2018 में एक विवाह समारोह में पुत्री दुर्गा जसराज ने पैलेस के उस्ताद अली अकबर ऑडिटोरियम में प्रस्तुति दी थी।

इससे पहले 30 जनवरी 2015 को फतेहसागर स्थित रामानुजकोट वेंकटेश मंदिर के 125 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय महोत्सव के समापन समारोह में उन्होंने राग दरबारी कान्हड़ा में त्रिताल रचना अनोखा लाड़ला खेलण को मांगे चांद ...राग जयजयवंती में झूला एवं राग अडाणा में माता कालिका महाकाल महारानी. जगत जननी भवानी भवानी...जैसी रचनाएं पेश कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया था। संगीतज्ञ राजेन्द्र वैष्णव ने भी उनके साथ संंगत की थी। मंदिर ट्रस्ट के संरक्षक श्रीपति मेहता ने उनसे जुड़ी यादें करते हुए बताया कि वे जब भी जोधपुर आते रामानुजकोट मंदिर में मूर्ति के समक्ष साधना जरूर करते थे।


मित्र को अनूठी सौगात

स्वरसुधा जोधपुर के सचिव रहे प्रो. महावीर व्यास प्रसाद व्यास 'आत्तूसा के जन्मदिन पर पं. जसराज अचानक उनके घर पहुंचे और उपहार के रूप में दो भक्ति रचना प्रस्तुत कर चौंका दिया। संगीत नाटक अकादमी के चेयरमैन रहे ब्रह्मबाग निवासी रामकिशन कल्ला को वे पिता तुल्य मानते थे। जब भी उनका मन उदास होता वे कल्ला को फोन करते और कहते 'भईजीÓ जोधपुर आने की इच्छा हो रही है। पं. जसराज के गुरु और बड़े भाई पं. मणीराम की पुत्री का विवाह जोधपुर निवासी आसकरण शर्मा से होने के बाद तो उनका यहां पारिवारिक रिश्ता भी बन गया।

उस्ताद सुल्तान खां से गहरी दोस्ती
उस्ताद सुल्तान खां के भतीजे सारंगीवादक इमरान खां ने बताया कि पं. जसराज और उस्ताद सुल्तान खां बचपन के दोस्त थे। जब उस्ताद ने हम दिल दे चुके सनम में अलबेला सजन गाया तो सबसे पहले जसराज ने ही गाने की तारीफ की थी।

वर्ष 2000 में किया था सम्मान
राजस्थान संगीत नाटक अकादमी की ओर से साल 2000 में पंडित जसराज को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लोक गायिका फतहकुमारी व्यास व अन्य कलाकारों के साथ जयपुर के रविन्द्र रंगमंच पर फैलोशिप अवार्ड से सम्मानित किया था। सेवानिवृत्त जस्टिस जीके व्यास ने उस मौके को याद करते हुआ कि पंडित जसराज की आवाज का जादू वर्षों तक याद किया जाएगा। राज.संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष रमेश बोराणा ने कहा कि उनके कंठ से निकले स्वर आनन्द की अनुभूति करवाते थे।

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