
Gold, silver became expensive last week , know how much price increase
जितेन्द्र सिंह राजपुरोहित/जोधपुर. सोना तो सोणा है ही, लेकिन चांदी की चमक भी सोने के मुकाबले कहीं फीकी साबित नहीं हो रही है। गत एक साल के सोने-चांदी के दामों के ग्रोथ पर नजर डालें तो चांदी भी सोने के मुकाबले कहीं पर भी कमजोर साबित नहीं हुई है। सोने में निवेश करने वाले तो खुश हैं ही, लेकिन चांदी में निवेश करने वालों की भी ‘चांदी’ हो गई है। पिछली दिवाली से अब तक चांदी ने सोने के बराबर लगभग 21 प्रतिशत रिटर्न दिया। आमतौर पर लोग सोने में निवेश करते हैं, लेकिन पिछली दिवाली से अब रिटर्न के आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि चांदी ने भी सोने के बराबर रिटर्न दिया है। कमोडिटी विशेषज्ञों की मानें तो अगले साल दिवाली तक चांदी में निवेश से सोने के मुकाबले ज्यादा रिटर्न मिल सकता है।
इस तरह समझे गणित
1. चांदी: पिछली दिवाली से अब तक चांदी का भाव 8 हजार 800 रुपए प्रतिकिलो बढ़ा है। पिछले साल 25 अक्टूबर को जोधपुर में चांदी 39700 रुपए प्रतिकिलो थी, जो इस साल 26 अक्टूबर को 48500 रुपए प्रतिकिलो हो गई। इस हिसाब से निवेशकों को करीब 21 प्रतिशत रिटर्न मिला।
2. सोना: पिछली दिवाली से अब तक सोने की कीमत भी 21 प्रतिशत बढ़ चुकी है। पिछले साल 25 अक्टूबर को जोधपुर में सोने की कीमत 32400 रुपए प्रति दस ग्राम थी, जो 26 अक्टूबर 2019 को 39800 प्रति दस ग्राम हो गई। जाहिर है निवेशकों को यहां भी 21 प्रतिशत रिटर्न मिला।
दाम बढऩे के आसार
विशेषज्ञों के अनुसार चांदी इस साल के अंत तक 60 हजार रुपए प्रतिकिलो का भाव छू सकती है। अगले दो महीने के दौरान चांदी 29 फीसदी रिटर्न दे सकती है। निवेश के लिए चांदी की मांग साल 2013-14 में 24 प्रतिशत थी, जो इन दिनों बढकऱ 28-30 प्रतिशत हो गई है।
इसलिए बढ़ी चांदी की मांग
फार्मा, बैटरी, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रोनिक्स समेत कम से कम 20 ऐसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र हैं, जहां चांदी की तगड़ी मांग बनी हुई है। आने वाले दिनों में चांदी की औद्योगिक मांग बढऩे की उम्मीद है, जो काफी दिनों से सुस्त पड़ी है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती इसकी सबसे बड़ी वजह है। लेकिन अब हालात सुधरने लगे हैं। चीन और अमरीका के बीच तनाव कम करने को लेकर बातचीत जारी है और तेल बाजार में स्थिरता आ रही है।
इसलिए बढ़ रही चांदी की चमक
1. अमरीका, तुर्की और ईरान के बीच तनाव
2. चीन के साथ अमरीका का ट्रेड वार जारी रहना
3. ब्रेग्जिट को लेकर चीजें स्पष्ट न होने से चिंता
4. ग्लोबल करेंसी का बाजार में उतार-चढ़ाव
Published on:
28 Oct 2019 11:57 am

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