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कई सरकारी चिकित्सक दे रहे हैं निजी क्लिनिक में सेवाएं, चिकित्सा मंत्री की जांच के बाद भी पूरी नहीं हो रही कार्यवाही

चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने करवाई थी ठीक एक साल पहले सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टर्स पर निजी क्लिनिक में कार्य करने की जांच, अभी तक डॉक्टर्स चला रहे निजी क्लिनिक
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Government doctors

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जोधपुर. डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के सेवारत चिकित्सक निजी क्लिनिक चला रहे हैं। इसकी शिकायत पर चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने गत वर्ष जांच कराई थी। जिसमें जोधपुर के 11 चिकित्सक जांच में दोषी निकले, लेकिन दोषी पाए गए चिकित्सकों की रिपोर्ट अभी तक दबी पड़ी है। हालांकि कई चिकित्सकों की फेहरिस्त अभी बाकी है, कई डॉक्टर्स तक टीम पहुंची तक नहीं। जबकि ये जांच संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में हुई थी। जांच में अपर जिला मजिस्ट्रेट शहर प्रथम, पुलिस कमिश्नर से अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, एसएन मेडिकल कॉलेज के अतिरिक्त प्राचार्य, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के संयुक्त निदेशक व एमडीएम अस्पताल के उपाधीक्षक कमेटी में शामिल किए गए थे।

जांच में अंकुर नर्सिंग होम में शिशु रोग प्रोफेसर डॉ. प्रमोद शर्मा, हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. गोविंद पटेल की पाल रोड पर क्लिनिक, बासनी क्षेत्र में सरोज हॉस्पिटल में शिशु रोग विभाग के डॉ. अनुरागसिंह, चौपासनी हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र स्थित दूसरा पुलिया पर मेडिसिन के डॉ. विनीत तिवारी, गीता भवन के सामने विनायका अस्पताल में यूरोलॉजिसट डॉ. प्रदीप शर्मा, रातानाडा स्थित शिवम अस्पताल में शिशु रोग के डॉ. जेपी सोनी व कीर्ति आइवीएफ क्लिनिक में ओंकोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप गौड़ की ओर से निजी क्लिनिक पर कार्य करना पाया गया। इनमें कई चिकित्सक अपनी पत्नी के साथ निजी क्लिनिक में सहयोग करते हैं।

जांच के दिनों में लंबे समय से पावटा जिला अस्पताल में स्वेच्छा से अनुपस्थित चलने वाले अस्थि रोग के डॉ. एसपी सिंह राठौड़ कैलाश हॉस्पिटल में सेवाएं देते पाए गए थे। इसके अलावा कुड़ी हाउसिंग बोर्ड में एमडीएम अस्पताल के यूरोलॉजिस्ट डॉ. आरके सारण व उम्मेद अस्पताल गायनोकॉजिस्ट डॉ.किरण मिर्धा का थार हॉस्पिटल कुड़ी हाउसिंग बोर्ड में सेवाएं देना पाया गया। गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. सुनील दाधीच का कमला नगर अस्पताल के सामने खुद का क्लिनिक होना पाया गया। इन सभी पर सरकारी रिपोर्ट में कार्रवाई अपेक्षित है।

कई महीनों तक पड़ी रही जांच रिपोर्ट!
जांच रिपोर्ट पूरी होने के बाद कई महीनों तक संभागीय आयुक्त कार्यालय में पड़ी रही। उसके बाद संभागीय आयुक्त ने प्रिंसिपल को भेज कार्रवाई करने को कहा। प्रिंसिपल ने भी रिपोर्ट अपने स्तर पर कई दिनों तक दबाए रखी। उसके बाद दवाब पड़ा तो प्रिंसिपल ने सभी को पत्र देकर स्पष्टीकरण मांगा। बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद प्रिंसिपल ने सभी के स्पष्टीकरण सरकार को भेजे। लेकिन अभी तक कार्रवाई का इंतजार है।

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