
जिस गौशाला मैदान का उपयोग करते हैं शहरवासी, उसकी सूरत संवारने के लिए अब कटेगी सरकारी स्कूलों की जेब
जोधपुर. शाला क्रीड़ा संगम केन्द्र गोशाला मैदान की सूरत सुधारने व विकास कार्य के लिए शिक्षा विभाग अब सरकारी स्कूलों के छात्रकोष का २५ फीसदी हिस्सा लेगा। इसके लिए राजकीय विद्यालय वित्तिय वर्ष २०१८-१९ (३१ मार्च) तक के छात्र कोष में उपलब्ध बचत राशि को ब्लॉक स्तर पर इकट्टा कर आगे राशि भिजवाएंगे। जबकि दूसरी ओर सरकारी स्कूल खुद सुविधा व संसाधन से जूझ रहे हैं।
छात्र व खिलाडि़यों में अंतर करना भूला शिक्षा विभाग
साल २०१५ के फरवरी माह में शिक्षा विभाग ने छात्रकोष की राशि का उपयोग करने के लिए सर्कुलर निकाला था। तत्कालीन निदेशक ने छात्रकोष की राशि का सदुपयोग शैक्षिक व्यवस्था, पीने के पानी, दरी पट्टी बिछाने, डेस्क व टेबल कुर्सी पर खर्च करने के लिए कहा गया था। जबकि गोशाला का कार्य सीधे तौर पर खिलाडि़यों के विकास के लिए होगा, सरकारी स्कूल का हरेक विद्यार्थी खिलाड़ी नहीं है। जबकि इस मैदान का उपयोग शहरवासी भी करते हैं।
आज शिक्षक करेंगे प्रदर्शन
राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) का आरोप है कि कक्षा ९ से १२ तक शाला विकास के लिए छात्र कोष में सामान्य छात्र से २ सौ रुपए व एससी-एसटी बच्चों से १०० रुपए शुल्क लिया जाता है। समाज उत्पादन उपयोगी कार्यों के ५०, स्काउट के ५ व छात्र दुर्घटना बीमा के लिए १० रुपए प्रति विद्यार्थी लिए जाते हैं। डीईओ की अनुमति से राशि खर्च की जाती है। स्कूलों में लाखों रुपए के कोष इकट्टा है। प्रदेश उपाध्यक्ष रूपाराम रलिया व जिलाध्यक्ष रूपाराम खोजा ने बताया कि संघ विभाग के एेसे आदेशों का विरोध करता है, इस राशि का विद्यार्थियों के अध्ययन व सुविधा संसाधन पर खर्च किया जा सकता है। संयुक्त मंत्री श्यामसिंह सजाड़ा व शिक्षक नेता सुभाष विश्नोई ने बताया कि शुक्रवार शाम ४ बजे सभी शिक्षक नेता महावीर उद्यान के बाहर प्रदर्शन करेंगे। जिला कलक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देंगे।
बचत राशि का पैसे ले रहे हैं
स्कूलों की बचत व जमा पड़ी एफडी का पैसा ले रहे हैं। कइयों के पास छह से १० लाख रुपए तक की एफडी पड़ी है। कई स्कूलें तो पैसे खर्च नहीं कर रही हैं। हमारी मंशा बच्चों की सुविधा पर ताला लगाना नहीं है। जो राशि उपयोग में नहीं आ रही है, उसके लिए प्रस्ताव लिया गया है।
- प्रेमचंद सांखला, कार्यवाहक संयुक्त निदेशक, जोधपुर मंडल, शिक्षा विभाग
पत्रिका व्यू : पैसे जमा पड़े तो विभाग क्या कर रहा था
शिक्षाधिकारियों का कहना हैं कि सरकारी स्कूलों के कोष में १०-१५ लाख रुपए की एफडी पड़ी है। सच्चाई ये हैं कि कई स्कूलों में छात्र दरियों पर बैठे रहते हैं। टेबल-कुर्सियां तक उनके पास नहीं है। बारिश के सीजन में छतों से पानी टपकता है। हरेक संस्था प्रधान को उचित समय पर राशि खर्च करने के लिए विभाग पाबंद क्यों नहीं करता?
Updated on:
29 Nov 2019 02:12 pm
Published on:
29 Nov 2019 02:10 pm

बड़ी खबरें
View Allजोधपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
