
जीपीएफ की मनमानी: खातों से काटते राशि लेकिन बताने से परहेज
जोधपुर।
प्रदेश के सभी जिलों में सैंकड़ों कर्मचारियों के खातों में जीपीएफ की ऑनलाइन कटौती का उनके खातों में दर्ज नहीं होने के कारण सेवानिवृति के बाद पूरा भुगतान नहीं मिल रहा है। कर्मचारियों को राज्य बीमा विभाग तथा सेवानिवृत विभाग के चक्कर काटने पड़ रहे है। राज्य सरकार ने मार्च 2012 से कर्मचारियों के जीपीएफ खातों में वेतन बिल, सभी प्रकार की कटौतियां व भुगतान से संबंधित सारी कार्यवाही ऑनलाइन कर दी। सरकार की ओर से यह व्यवस्था लागू करते समय जीपीएफ कार्यालय में मार्च 2012 तक सभी कटौतियों का इन्द्राज ऑनलाइन कर्मचारियों के खाते में पोस्टिंग करके सेवानिवृति पर पूर्ण भुगतान का दावा किया गया था लेकिन इन हालातों से सरकार के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है।
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प्रकरण 1
रूपसिंह इन्दा राजस्थान पुलिस उप निरीक्षक पद जोधपुर से सेवानिवृत हुए। इनके जीपीएफ खाता सं. 303981 में मार्च 2012 से 2014 तक 46,653 रुपए की कटौती बाड़मेर जिले से ऑनलाइन हुई। जीपीएफ कार्यालय बाड़मेर को यह राशि जोधपुर शहर में स्थानान्तरण के लिए लिखा तब उनके द्वारा 16 जनवरी को सूचित किया गया कि ऑनलाइन पोस्टिंग होने से खाता स्थानान्तरण की आवश्यकता नही है। जबकि संयुक्त निदेशक जोधपुर ग्रामीण ने 27 फ रवरी 2019 को सूचित किया की अन्य जिलों से खाता प्राप्त होने पर ही भुगतान किया जाएगा। रूपसिंह को सेवानिवृति पर जीपीएफ में 1 लाख 65 हजार रुपए कम मिले।
प्रकरण 2
गीता शर्मा जीपीएफ खाता सं. 74789 31 अगस्त 2017 को शिक्षा विभाग अजमेर से सेवानिवृत हुई। उनके वेतन में से अगस्त 2013 से जून 2017 तक 64266 रुपए की ऑनलाइन कटौती हुई। गीता को सेवानिवृति पर जीपीएफ में 1 लाख 60 हजार रुपए कम भुगतान मिला।
प्रकरण 3
मोहनसिंह वन विभाग पाली से 31 अगस्त 2017 को सेवानिवृत हुए। जीपीएफ खाता सं. 641127 में वर्ष 2014 में 64 हजार रुपए ऑनलाइल जीपीएफ की कटौती का भुगतान नहीं मिला। उप निदेशक राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग पाली ने ऑनलाइन राशि जमा होने के बावजूद भी सेवानिवृति पर इस राशि का ब्याज सहित भुगतान नहीं किया।
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मार्च 2012 से पहले ऑफ लाइन कटौती होने के कारण 90 प्रतिशत सेवानिवृत कर्मचारियों को जीपीएफ में कम भुगतान मिला। ऑनलाइन पोस्टिंग होने से कार्यरत कर्मचारियों को सेवानिवृति पर पूर्ण भुगतान का विश्वास हुआ परन्तु राज्य बीमा कार्यालयों की कार्यप्रणाली से इन कर्मचारियों के साथ विश्वासघात हुआ है।
भभूतराम विश्नोई, सेवानिवृत प्लाटुन कमाण्डर, आरएसी, जोधपुर
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मार्च 2012 के बाद जो रिटायर हुए है उनका भुगतान हो रहा है। अगर 10-12 साल पुराना मामला है तो किन्हीं तकनीकी खामियों की वजह कटौतियों में मिलान नहीं हो रहा है, इसलिए उनका भुगतान नहीं हो रहा है। हमारा प्रयास है सबका भुगतान हो, इसके लिए उनको जीए-55 लाना होगा।
एमएम कटारिया , संयुक्त निदेशक राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग जोधपुर
Published on:
16 May 2019 08:29 pm
