
रेलवे में नौकरी का झांसा देकर पांच लाख हड़पे, बदले में नकली पट्टा व पावर दी
जोधपुर।
महामंदिर थानानतर्गत दाधीच नगर में रेलवे माल गोदाम में नौकरी लगाने का झांसा देकर एक युवक से पांच लाख रुपए ऐंठ लिए गए। नौकरी न लगने पर पीडि़त ने पुलिस में शिकायत की तो आरोपी ने एक माह में ब्याज सहित रुपए लौटाने का भरोसा दिलया था। बदले में पाल गांव के एक भूखण्ड का पट्टा व पावर दिया, लेकिन जांच में वो भी फर्जी निकले। अब पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।
पुलिस के अनुसार महामंदिर तीसरी पोल के बाहर दाधीच नगर निवासी मनोज कुमार पुत्र रमेश तंवर ने गंगाणा में इन्द्रप्रस्थ नगर निवासी मनीष कुमार पुत्र सोहनलाल प्रजापत, उसकी पत्नी संतोष, ससुर हिम्मताराम, ओमप्रकाश पुत्र मोहनलाल सरगरा और दोस्त व उसके पिता के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया। आरोप है कि दोस्त योगेश व उसके पिता पुखराज परिहार ने पिछले साल सरकारी नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया था। उन्होंने आरोपी मनीष कुमार से मिलवाया था। उसने रेलवे माल गोदाम व एम्स में नौकरी लगाने का झांसा दिया था। बदले में 11 लाख रुपए मांगे थे। फिर 10 लाख रुपए देना तय हुआ था। उसने मोबाइल में रेलवे माल गोदाम व के फोटो व आइडी कार्ड के फोटो भी दिखाए थे। गत 18 मई को आरोपी मनीष पीडि़त के घर पहुंचा था, जहां मनीष ने खुद को रेलवे में अधिकारी बताया था। उसने सरेचा निवासी ओमप्रकाश पुत्र मोहनलाल सरगरा को रेलवे माल गोदाम में अधिकारी बताकर बात करवाई थी। उसने भी नौकरी लगवाने व दस लाख रुपए देने की बात कही। इसके बावजूद युवक को भरोसा नहीं हुआ तो आरोपी ने अपनी पत्नी व ससुर से मिलवाया था। उन्होंने भी नौकरी लगाने का आश्वासन दिया था। तब पीडि़त ने 40 हजार रुपए पेटीएम किए थे। 2.60 लाख रुपए चेक से दिए थे। 20 मई को नियुक्ति पत्र व रेलवे का आइडी कार्ड बनाने के लिए दो लाख रुपए और ले लिए थे। नियुक्ति पत्र के लिए दबाव डालने पर आरोपी ने उससे आवेदन पत्र भरवाया था और पासपोर्ट साइज के फोटो, शैक्षणिक दस्तावेज लेकर स्टाम्प पेपर ले लिए थे।
थाने में समझौता, एक माह मांगा, दस्तावेज फर्जी निकले
इसके काफी समय बाद नौकरी न लगने पर पीडि़त ने आरोपियों से सम्पर्क किया था, लेकिन उन्होंने रुपए देने से मना कर दिया था।11 अगस्त को पीडि़त ने महामंदिर थाने में लिखित शिकायत दी थी। पुलिस मनीष को थाने लाई, जहां उसने रुपए लेना कबूला था। फिर उसने एक माह में ब्याज सहित रुपए लौटाने का भरोसा दिलाया था। तब तक के लिए उसे पाल गांव में भूखण्ड का पावर और पट्टा दिया था। रुपए न देने पर पावर से भूखण्ड का बेचान करने की बात कही थी। दो महीने तक रुपए न मिलने पर पीडि़त ने पाल सरपंच व ग्राम विकास अधिकारी को भूखण्ड के दस्तावेज दिखाए तो वो फर्जी निकले। उसका भूखण्ड ही नहीं था।
Published on:
04 Mar 2024 07:00 am
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