
जोधपुर में हरियाली 2 प्रतिशत, 33 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति के लिए लगेंगे कई साल........पढ़े पूरी खबर
जोधपुर. राज्य सरकार की ओर से वनीकरण को बढ़ावा देने व पौधरोपण में जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए कम दरों पर पौधे उपलब्ध कराने का लक्ष्य इस साल घटकर 15 प्रतिशत रह गया है। हर साल वनविभाग की नर्सरियों के माध्यम से करीब 10 लाख से अधिक पौधे तैयार कर वितरित किए जाते रहे है लेकिन कोविडकाल के बाद इस साल का लक्ष्य मात्र 1 लाख 48 हजार 793 पौधों का रखा गया है जो पन्द्रह प्रतिशत से भी कम है। जिले की 17 नर्सरियों में से एक मात्र चांदपोल के बाहर भूतेश्वर नर्सरी से ही इस साल पूरे जिले की ग्राम पंचायतों, केन्द्र व राज्य सरकार के विभिन्न राजकीय विभागों, सेना तथा शिक्षण संस्थाओं को पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे।
राष्ट्रीय वन नीति का लक्ष्य प्राप्त करने में लगेंगे 33 साल
राष्ट्रीय वन नीति के तहत किसी भी जिले के कुल भू भाग का 33 प्रतिशत हरा-भरा होना चाहिए। जोधपुर जिले के 22 हजार 850 वर्ग किमी क्षेत्र वर्तमान में मात्र 2 प्रतिशत ही हरा भरा है। राष्ट्रीय वन नीति के तहत हरा-भरा करने के लिए हर साल यदि 1 प्रतिशत भूमि को भी पौधरोपण कर हरा भरा करने की शुरुआत की जाए तब भी 33 प्रतिशत का लक्ष्य हासिल करने को 33 साल लग जाएंगे।
सरकार की ओर से कोई मोनटरिंग नहीं
पौधरोपण के बाद जोधपुर जिला तो दूर पूरे राज्य में प्रोपर मोनटरिंग की व्यवस्था तक नहीं है। दो दशक पहले 2002 में पंचायती राज विभाग ने पौधरोपण के बाद ग्रामीण क्षेत्र में प्रोपर मोनेटरिंग के लिए बीडीओ की जिम्मेदारी तय भी की थी। उसके बावजूद सरकारी आदेश आज तक कागजों में ही धूल फांक रहे है।
लगाना तो दूर जो काट दिए उसकी भरपाई भी नहीं
जेडीए व नगर निगम की ओर से सड़कों के विस्तार एवं शहरी विकास के नाम पर हजारों पेड़ काटने के बाद नियमानुसार दस गुणा छायादार पेड़ लगाने का प्रावधान होने के बावजूद इस दिशा में अभी तक नए पेड़ लगाने की शुरुआत तक नहीं हो पाई है।
जोधपुर वन विभाग की नर्सरियों में पौधे
वर्ष ----- संख्या
2017----7.2 लाख
2018---8.5 लाख
2019--9.62 लाख
2020---- 25 लाख 93 हजार (औषधिय पौधे सहित)
2021---7 लाख (औषधिय पौधे सहित)
आमजन व संस्थाओं के लिए 1 लाख 48 हजार पौधेइस साल जोधपुर जिले के शेरगढ़, डोली, सालावास, गुड़ा विश्नोइयां, शेखाला, भूतेश्वर व लॉक्सवेल नर्सरी में कुल 2 लाख 46 हजार 231 पौधे तैयार किए गए है। इनमें से 1 लाख 48 हजार पौधे अलग-अलग सरकारी एजेंसियों संस्थाओ तथा आमजन को वितरित किए जाएंगे। इनमें शीशम, करंज, नीम, कचनार, प्लेटाफार्म, गुलमोहर, फलदार व फूलदार पौधों का वितरण शुरू कर दिया गया है। शेष पौधे नरेगा के लिए रिजर्व होंगे।
-मदनसिंह बोड़ा, सहायक वन संरक्षक जोधपुर
ऐसे तो ग्लोबल वार्मिंग को रोकना मुश्किल होगा
वनविभाग की पौधशालाओं में तैयार पौधे उचित मूल्य पर आमजन को दिए जाते हैं परन्तु इस वर्ष वनविभाग की पौधशालाओं में पौधों की उपलब्धता नगण्य है। मुख्यमंत्री के गृह जिले में नाममात्र संख्या में पौधे तो एक तरह से ऊंट के मुंह में जीरा समान है। पौधों की अनुपलब्धता से आमजन को निजी पौधशालाओं से महंगे पौधे खरीदने पर विवश होना पड़ेगा। यदि ऐसा ही रहा तो ग्लोबल वार्मिंग रोकनामुश्किल हो जाएगा। वनविभाग को चाहिए कि अन्य जिलों से जहां पौधों की अधिकता है, वहां से मंगवाकर वितरण की व्यवस्था दुरुस्त करें। राजस्थान पत्रिका के हरियाळो राजस्थान अभियान के तहत आमजन और संस्थाओं को भी ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने होंगे।
-प्रसन्न पुरी गोस्वामी, पर्यावरणविद व अध्यक्ष, मेहरानगढ़ पहाड़ी पर्यावरण विकास समिति,
Published on:
05 Jul 2022 08:13 am

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