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अब डेंगू-चिकनगुनिया व मलेरिया पर धावा बोलेगी गप्पी फिश, जोधपुर में पहली बार होगा मछलियों का प्रयोग!

गत वर्ष बाईजी का तालाब में गंदगी के कारण मर गई थी गंबूसिया मछलियां, अब लाई जाएंगी गप्पी व कौस्लिया रेक्यूलेटा
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guppy fishes will be used to curb malaria and chikungunya

अब डेंगू-चिकनगुनिया व मलेरिया पर धावा बोलेगी गप्पी फिश, जोधपुर में पहली बार होगा मछलियों का प्रयोग!

अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. कांगो फीवर के साथ स्वाइन फ्लू, डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया ने चिकित्सा विभाग के नाक में दम कर दिया है। मच्छरों पर काबू पाने के लिए चिकित्सा विभाग शहर के सरोवरों में पहली बार गप्पी व कौस्लिया रेक्यूलेटा मछलियां छोड़ेगा। यह मछलियां साफ पानी के अलावा गंदे पानी में भी मलेरिया व चिकनगुनिया के लार्वा को चट कर जाएंगी। साफ पानी में इन मछलियों के साथ गंबूशिया मछली भी छोड़ी जाएगी। चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग ने गप्पी और कौस्लिया रेक्यूलेटा मछलियां मंगवाने की तैयारी कर ली है।गत वर्ष बाईजी तालाब क्षेत्र में चिकनगुनिया के ज्यादा केस आने के बाद चिकित्सा विभाग ने गंबूशिया मछलियां छोड़ी थी। लेकिन इन मछलियों के दम तोड़ देने से प्रयोग पूरी तरह विफल हो गया था। इसके बाद विभाग ने गप्पी और कौस्लिया रेक्यूलेटा मछलियां मंगाने का निर्णय किया। विभाग के अनुसार ये दोनों मछलियां पहली बार प्रदेश में मंगवाई जा रही है।

महाराष्ट्र व मध्यप्रदेश सरकार कर चुकी है उपाय
गप्पी व रेस्क्यूलेटा मछलियों का प्रयोग महाराष्ट्र व मध्यप्रदेश में सरकारें कर चुकी है। गंदे पानी में यह मछलियां 12 से 13 घंटे में करीब 3 सौ से अधिक लार्वा खा सकती है।

एनसीडीसी की टीम ने दिया था सुझाव
इन मछलियों को मंगवाने का सुझाव दिल्ली से आई नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल की टीम ने दिया था। इनसे चिकनगुनिया व मलेरिया जैसी बीमारियों से काफी हद तक निजात मिलेगी।
- डॉ. बलवंत मंडा, सीएमएचओ

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