
मार्च का आधा पखवाड़ा बीता फिर भी कुरजां ने नही भरी उड़ान
जोधपुर. जैव विविधता से समृद्ध पश्चिमी राजस्थान में शीतकाल के दौरान आने वाले प्रवासी पक्षी कुरजां को मारवाड़ की आबोहवा इस बार भी रास आई है। प्रेम और विरह के प्रसिद्ध लोक गीत कुरजा ए म्हानै भंवर मिला दिजै सोन चिड़ी तू तो म्हारी भायली दीजै पिवजी ने संदेस के प्रतीक प्रवासी पक्षी डेमासाइल क्रेन के कोलाहल से जोधपुर जिले का खींचन गांव मार्च का आधा पखवाड़ा बीतने के बाद भी कलरव से गूंज रहा है। बर्ड फ्लू और कोरोनकाल में छह माह से अधिक समय तक सुरक्षित प्रवास पूरे होने का बावजूद कुरजां अपने वतन लौटने की जगह जोधपुर जिले के खींचन में डेरा डाले हुए है। अमूमन थार में तापमान बढ़ते ही शीतकालीन प्रवास पर आने वाले प्रवासी पक्षी कुरजां अपने वतन को लौटने के लिए उडान भरने लगती है । इस बार भी 15 फरवरी से ही कुरजां ने अपने गंतव्य की ओर पलायन शुरू कर दिया लेकिन इस दौरान मौसम के बदलाव के कारण पलायन थम सा गया। अब मार्च का आधा पखवाड़ा बीतने के बाद अब भी करीब 16 हजार कुरजां खींचन में डेरा डाला हुए है ।
गंतव्य की ओर उड़ान से पहले ग्रुप लीडर की मौत
शीतकालीन प्रवास पर आने वाले कुरजां के समूह का नेतृत्व सबसे आगे एक ग्रुप लीडर करता है, जो पड़ाव स्थल तय करने के लिए पहले मौके पर पहुंचता है । पड़ाव स्थल पर किसी भी तरह का खतरा या मौसम, भोजन की अनुकूलता न होने पर स्थान परिवर्तन करने की सूचना देता है। इस बार कुरजां के समूह का नेतृत्व करने वाले ग्रुप लीडर की कुछ दिनों पहले मौत हो गई थी।
एक माह में कुरजां के उड़ान भरने का क्रम
15 फरवरी- 35000
16 फरवरी -33000
17 फरवरी -32000
18फरवरी- 30000
22 फरवरी-28000
23 फरवरी-27000
6 मार्च--- 25000
12 मार्च --22000
13 मार्च---20000
16 मार्च --16000
अभी तक 16 हजार पक्षी खींचन में
विश्व पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने वाले मेहमान पक्षी कुरजां सितम्बर के अंतिम सप्ताह से मार्च तक खींचन में शीतकालीन प्रवास पर रहते है। इस बार गर्मी शुरू होते ही उड़ान भरना शुरू किया था लेकिन मौसम में बदलाव और ग्रुप लीडर की मौत के बाद आधे से अधिक करीब 16 हजार पक्षी अभी तक खींचन में है। गर्मी से बचाव के लिए पेड़ों के नीचे भी विश्राम करते नजर आते है।
सेवाराम माली, पक्षी चुग्गाघर सेवादार खींचन
Published on:
18 Mar 2021 12:00 am
