कोरोना संक्रमण के बीच हाईकोर्ट का सरकार को बड़ा निर्देश

राज्य सरकार से मांगी संक्रामक रोग संस्थान की प्रगति रिपोर्ट, पूछा क्या हुआ संस्थान के सुदृढ़ीकरण की दिशा में काम

By: Suresh Vyas

Updated: 29 Jun 2020, 10:04 PM IST

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने संक्रामक रोग संस्थान के अपग्रेडेशन, रीमॉडलिंग एवं नवीनीकरण के उद्देश्य से करवाए जा रहे कार्यों की मॉनिटरिंग के लिए गठित कमेटी की बैठक के बाद पालना रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी। कोर्ट ने कहा कि कमेटी की बैठक यदि परस्पर मौजूदगी से संभव नहीं हो तो वीडियो कॉन्फे्रंसिंग से की जा सकती है।
वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा व न्यायाधीश रामेश्वर व्यास की खंडपीठ में स्वप्रसंज्ञान के आधार पर दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता पंकज शर्मा ने कहा कि कोविड-19 के प्रकोप के चलते संक्रामक रोग संस्थान का अपेक्षित कार्य पूरा नहीं हो सका। मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक भी नहीं हो पाई। बैठक एक सप्ताह में बुलाना प्रस्तावित है। इसके बार राज्य सरकार की ओर से पालना रिपोर्ट पेश की जा सकेगी। दरअसल, हाईकोर्ट ने जोधपुर शहर में स्वाइन फ्लू के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए 5 फरवरी, 2015 को स्वप्रसंज्ञान लेते हुए जनहित याचिका की सुनवाई शुरू की थी। पिछले साल फरवरी महीने में सुनवाई के दौरान वायरस व संक्रामक रोगों की जांच व निदान के संबंध में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने के लिए कोर्ट ने संस्थान की मॉनिटरिंग शुरू की। कोर्ट ने एसएन मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल डॉ.अरविंद माथुर, डिपार्टमेंट ऑफ हैल्थ रिसर्च, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के पूर्व सचिव डा.वीएम कटोच, न्याय मित्र विकास बालिया, सार्वजनिक निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता तथा मेडिसिन विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ.नवीन किशोरिया को कमेटी में शामिल किया था। कमेटी को निरीक्षण के आधार पर उपकरणों की विशिष्टियां, लैब, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता व प्रगति के संबंध में रिपोर्ट देनी थी।

यह थी योजना
वायरस, वेक्टरजनित तथा संक्रामक रोगों पर रिसर्च, क्लिनिकल प्रैक्टिस, हैल्थ केयर संस्थानों को शिक्षित करने के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने के लिए संस्थान की परिकल्पना की गई थी। इसके तहत हॉस्पीटल लैब, संक्रामक रोगों की जांच की विश्वसनीयता में सुधार, फैकल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम तथा संक्रामक रोगों के क्षेत्र में एमडी प्रोग्राम तैयार करने का मूलभूत लक्ष्य रखा गया था। वर्ष 2011-12 के बजट में इसकी घोषणा करते हुए 11.30 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया, जिसमें से 9.80 करोड़ रुपए भवन निर्माण, 2 करोड़ रुपए उपकरण खरीद, 40 लाख रुपए फर्नीचर तथा 20 लाख रुपए की दवाइयां खरीदना प्रस्तावित था। राज्य सरकार ने हाल ही 5.21 करोड़ रुपए उपकरणों की खरीद और 2.50 करोड़ रुपए प्रयोगशालाओं की रीमॉडलिंग और रिनोवेशन के लिए मंजूर किए हैं।

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