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संस्थान की मान्यता की जानकारी लिए बिना कोर्स करने वाले युवाओं के साथ एेसा हुआ

कुछ युवा अनजाने में एेसी गलती कर जाते हैं, जो उन पर बहुत भारी पड़ जाती है। संस्थान की मान्यता के बारे में जानकारी लिए बिना लैब टैक्नीशियन का कोर्स करने वाले युवाओं के साथ भी एेसा ही कुछ हुआ है। राजस्थान उच्च न्यायालय खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपीलें स्वीकार करते हुए एकलपीठ का आदेश निरस्त कर दिया है।

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rajasthan high court

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राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने गैर मान्यता प्राप्त संस्थानों से लैब टेक्नीशियन कोर्स पास करने के मामले में जहां राज्य सरकार की अपीलें स्वीकार करते हुए एकलपीठ का निर्णय निरस्त कर दिया है।

कोई भी कोर्स मान्य नहीं हो सकता

एक अन्य मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर अपीलें खारिज करते हुए उनके खिलाफ दिया गया एकलपीठ का निर्णय बहाल रखा है। दोनों के संयुक्त फैसले में कहा गया है कि बिना मान्यता प्राप्त संस्थाओं से किया गया कोई भी कोर्स मान्य नहीं हो सकता।

मान्यता प्राप्त संस्थान नहीं

जस्टिस गोविन्द माथुर व जस्टिस जीआर मूलचंदानी की खंडपीठ ने अमितकुमार व अन्य के खिलाफ पेश की गई अपीलें स्वीकार कीं। वहीं दूसरे मामले में इसी तरह की तीन याचिकाएं खारिज कर दीं। सरकार की ओर से पैरवी करते हुए राजकीय अधिवक्ता अनिल बिस्सा ने बताया कि अमित कुमार व अन्य ने डूंगर महाविद्यालय बीकानेर से लैब टेक्नीशियन का कोर्स किया था जो कि मान्यता प्राप्त संस्थान नहीं हैं।

तीन याचिकाएं खारिज

इस के केस में तीन याचिकाकर्ताओं ने जनार्दनराय नागर संस्थान उदयपुर से कोर्स किया था, वो भी मान्यता प्राप्त नहीं हैं। मामले के अनुसार चिकित्सा विभाग ने 7 जुलाई 2008 को लैब टेक्नीशियन के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे, लेकिन बिना मान्यता के संस्थान से कोर्स करने वालों के आवेदन निरस्त किए गए हैं जो कि उचित था। हाईकोर्ट ने एकलपीठ के आदेश को यथावत रखते हुए सरकार की अपीलों को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को राहत दी है। वहीं तीन याचिकाएं भी खारिज कर दी हैं।

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