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बिना विचार अभियोजन स्वीकृति जारी करने पर Rajasthan High Court ने जताया असंतोष

राजस्थान हाईकोर्ट ने लोकसेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में उचित विचार के बिना अभियोजन स्वीकृति जारी करने की प्रवृत्ति पर असंतोष जाहिर करते हुए गृह एवं कार्मिक विभाग के सचिव को तीन बिंदुओं पर शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
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rajasthan high court jodhpur : बिना विचार अभियोजन स्वीकृति जारी करने पर हाईकोर्ट ने जताया असंतोष

rajasthan high court jodhpur : बिना विचार अभियोजन स्वीकृति जारी करने पर हाईकोर्ट ने जताया असंतोष

बिना विचार अभियोजन स्वीकृति जारी करने पर हाईकोर्ट ने जताया असंतोष
गृह एवं कार्मिक विभाग के सचिव को तीन बिंदुओं पर शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश
जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने लोकसेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में उचित विचार के बिना अभियोजन स्वीकृति जारी करने की प्रवृत्ति पर असंतोष जाहिर करते हुए गृह एवं कार्मिक विभाग के सचिव को तीन बिंदुओं पर शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

न्यायाधीश पुष्पेंद्र सिंह भाटी की एकल पीठ में एक याचिकाकर्ता कांस्टेबल भंवरलाल ने बांसवाड़ा के पुलिस अधीक्षक की ओर से उसके खिलाफ जारी अभियोजन स्वीकृति को चुनौती दी थी। नियमों के अनुसार भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को सक्षम अदालत में एक लोक सेवक के खिलाफ आरोप पत्र के साथ मामला चलाने के लिए अभियोजन स्वीकृति प्रस्तुत करने की आवश्यकता होती है। याची के अधिवक्ता संजीत पुरोहित ने कहा कि याची के खिलाफ उसी प्रारूप में स्वीकृति जारी कर दी गई, जो कि एसीबी ने भेजा था। एसपी ने उचित विचार किया ही नहीं। कोर्ट ने अधीनस्थ न्यायालय की अग्रिम कार्यवाही पर रोक लगाते हुए संज्ञान लिया कि ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं जहां अभियोजन स्वीकृति जारी करने वाले अधिकारी बिना दिमाग लगाए ऐसा करते हैं और एसीबी द्वारा भेजे गए प्रारूप को मंजूरी दे देते हैं। इसके चलते आरोपी राहत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं।

तीन बिंदुओं पर मांगा शपथ पत्र

एकल पीठ ने रजिस्ट्री को अभियोजन स्वीकृति से संबंधित सभी लंबित याचिकाओं को एक साथ सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया और कार्मिक और गृह सचिव को तीन बिंदुओं पर शपथ पत्र दायर करने को कहा है। पीठ ने राज्य सरकार से पूछा है कि प्रस्तावित मंजूरी के लिए कानून में क्या आवश्यकता है और प्राधिकारी क्यों एसीबी की ओर से प्रस्तावित प्रारूप को ही अंतिम मंजूरी के रूप में दोहराते हैं, जबकि इसके चलते सैकड़ों मामलों में मंजूरी कानूनी औचित्य खो देती हैं। साथ ही पीठ ने यह भी बताने को कहा है कि अभियोजन स्वीकृति के आदेशों को मजबूत करने की दिशा में क्या कदम उठाए गए हैं और उनमें खामियां न रखने के लिए क्या कार्रवाई की गई है। कोर्ट ने चेताया कि यदि इस तरह के सामान्य प्रस्तावों का उचित शपथ पत्रों और राज्य सरकार के उचित रुख से अवगत नहीं करवाया गया तो कोर्ट जुर्माना लगाने की कार्रवाई करेगी।

लंबित मामलों के निर्णय

पीठ ने कहा कि यह आदेश कई सालों से बार-बार इंगित की गई ऐसी खामियों की जांच करने में राज्य सरकार की विफलता के कारण पारित किया गया है, न कि केवल एक मामले के लिए। इसलिए सरकार की ओर दिए जाने वाले जवाब कोर्ट के समक्ष बड़ी संख्या में लंबित मामलों के निर्णय के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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