
हाईकोर्ट ने दी नाबालिग का गर्भ गिराने की अनुमति
जोधपुर (jodhpur).
राजस्थान हाईकोर्ट (rajasthan highcourt) ने बलात्कार पीडि़ता पंद्रह वर्षीय नाबालिग का 20 सप्ताह के गर्भ को गिराने की अनुमति दे दी।
कोर्ट के निर्देश पर गठित मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इस स्तर पर लड़की की उम्र को देखते हुए गर्भपात करना सामान्य स्वीकार्य सीमा के दायरे में है।
न्यायाधीश डॉ. पुष्पेंद्रसिंह भाटी की एकलपीठ ने यह आदेश जोधपुर जिला निवासी एक नाबालिग छात्रा की ओर से पिता के माध्यम से दायर याचिका निस्तारित करते हुए दिए।
कोर्ट ने 5 सितंबर को डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज (dr. sn medical college) को मेडिकल बोर्ड से पीडि़ता का स्वास्थ्य परीक्षण करने और मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट (एमटीपी) के तहत इस संबंध में स्पष्ट राय देने को कहा था कि इस स्टेज पर गर्भपात की अनुमति दिया जाना सुरक्षित है या नहीं।
कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में पेश मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार 19 सप्ताह, 5 दिन का गर्भ था और इस स्तर पर गर्भपात करना सामान्य स्वीकार्य सीमा के दायरे में है। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट (MTP) की धारा 3(2)(बी) के तहत 20 हफ्ते से ज्यादा के गर्भ को गिराने पर रोक है।
कोर्ट ने कहा कि बलात्कार पीडि़ता शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का शिकार होती है। ऐसे में कोर्ट ने डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज को विलंब किए बिना पीडि़ता का विशेषज्ञों की देखरेख में गर्भपात करने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल, पीडि़ता ने कुछ लोगों पर बलात्कार का मामला दर्ज करवा रखा है। इसे देखते हुए कोर्ट ने पीडि़ता का भू्रण सुरक्षित रखने के आदेश दिए हैं, ताकि भविष्य में डीएनए टेस्ट की जरूरत हो तो उसकी जांच की जा सके। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता डीएलआर व्यास ने पैरवी की।
Updated on:
14 Sept 2019 11:17 pm
Published on:
14 Sept 2019 11:17 pm
