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जोधपुर. एक तरफ तो सरकार सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क इलाज के लिए बढ़ावा दे रही है, दूसरी तरफ शहर के महात्मा गांधी अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार पर निजी अस्पतालों की चिकित्सा सुविधाओं का प्रचार हो रहा है। नगर निगम की ओर से लगाए गए यूनीपोल से न केवल महात्मा गांधी अस्पताल की हैरिटेज बिल्डिंग का आकर्षक स्वरूप छिप रहा है, बल्कि बाहर से आने वाले मरीज और उनके परिजन भी भ्रमित हो रहे हैं। इन यूनीपोल को हटाने के लिए अस्पताल प्रशासन की ओर से नगर निगम को कई बार पत्र लिखकर आग्रह किया गया, लेकिन निगम ने इन पर ध्यान नहीं दिया।
यूनीपोल पर विज्ञापन पेटे नगर निगम को बड़ी आय हो रही है। आय अर्जित करने के लिए नगर निगम ने अस्पताल की दीवार व गेट के पास ही यूनीपोल लगा दिए। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सरकारी अस्पताल के बाहर निजी अस्पतालों के होर्डिंग लगाकर प्रचार नहीं होना चाहिए। बाहर से आने वाले जिन मरीजों व उनके परिजनों जानकारी नहीं होती वे निजी अस्पतालों में पहुंच जाते हैं और उन्हें बड़ी रकम चुका कर इलाज करवाना पड़ता है। जबकि सरकारी अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सा विशेषज्ञों से परामर्श के साथ इलाज भी नि:शुल्क मिल रहा है।
बसें आती नहीं, बना दिया बस स्टॉप
जोधपुर विकास प्राधिकारी की ओर से अस्पताल के मुख्य भवन के सामने दीवार से सटकर बीआरटीएस बस स्टॉप बना दिए। जबकि वन-वे ट्रॉफिक व्यवस्था के कारण अस्पताल के सामने से जालोरी गेट की तरफ कोई बस नहीं गुजरती। ऐसे में इस बस स्टॉप के आगे ऑटो खड़े रहते हैं और खाली कुर्सियां पर लोग सोते रहते हैं।
एम्स व उम्मेद के बाहर भी प्रचार
निजी अस्पतालों के प्रचार वाले होर्डिंग व यूनीपोल एम्स और राजकीय उम्मेद चिकित्सालय के बाहर भी लगे हैं। यूनीपोल व होर्डिंग को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि यहां आने वाले मरीजों को निजी अस्पताल अपने यहां खींचकर ले जाना चाहते हो।
अस्पताल के मुख्य द्वार के पास लगाए निजी अस्पतालों के प्रचार वाले यूनीपोल-होर्डिंग को हटाने के लिए नगर निगम को कई बार लिखा जा चुका, लेकिन नगर निगम ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं।
-डॉ. पीसी व्यास, अधीक्षक, महात्मा गांधी चिकित्सालय, जोधपुर
मुझे अस्पताल के बाहर यूनीपोल लगे होने की जानकारी नहीं है। पता करवाकर ही कुछ कहा जा सकता है।
-ओपी कसेरा, आयुक्त नगर निगम, जोधपुर
Published on:
10 Jul 2018 03:08 pm
