
चार विदेशी भाषाएं बोलने वाली नगीना का कोरोना में रोजगार छीना तो घर चलाने पकड़ी नई राह
जोधपुर. कोरोना काल में कई युवाओं को अपने रोजगार से हाथ धोना पड़ा। ऐसे में आर्थिक तंगी के चलते कईयों ने जीवन से हार मान आत्महत्या तक कर ली। लेकिन शहर किल्ली खाना किले की घाटी निकट रहने वाली 47 साल की अनपढ़ नगीना का भी कोरोना के कारण रोजगार छीना तो उसने हार नहीं मानी और घर खर्च चलाने के लिए नया रोजगार ढूंढने में जुट गई। और फिर घर पर ही चुनरी बांधने का काम शुरू किया। जिससे ज्यादा नहीं लेकिन रोज के 150-200 रुपए कमा लेती है। नगीना ने बताया कि उनका एक बेटा मकान रंगरोगन का काम करता है। कुछ वह कमा लेता है। ऐसे में दो वक्त का भोजन मिल जाता है। नगीना का कहना है कि परिस्थितियां कितनी भी विपरित हो लेकिन हमें हार नहीं माननी चाहिए। खुदा एक दरवाजा बंद करता है तो दूसरे कई दरवाजे खोल देता है। 47 वर्षीय नगीना के संघर्ष की कहानी भी काफी लम्बी है। करीब 15 वर्ष पूर्व पति ने छोड़ दिया। तीन बच्चों की जिम्मेदारी सिर पर आई तो क्षेत्र में ही एक गेस्ट हाउस में साफ-सफाई का काम शुरू किया जिससे की बच्चों को पाल सके। एक-एक रुपया जोडकऱ बेटी के हाथ पीले किए। लेकिन कोरोना उनके लिए भी आफत बनकर आया। गेस्ट हाउस में विदेशी मेहमानों का आना बंद हुआ तो उन्हें भी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और घर पर ही चुन्नी बांधने का काम शुरू किया।
अनपढ़, फिर भी बोल लेती है चार विदेशी भाषाएं
गेस्ट हाउस में ठहरने वाले विदेशी मेहमानों के संपर्क में रहने के कारण अनपढ़ नगीना भी अंग्रेजी, फ्रेंच, स्पेनिश, जापानी आदि भाषाएं बोल लेती है। नगीना ने बताया कि वह अनपढ़ है लेकिन गेस्ट हाउस में आने वाले विदेशी मेहमानों को चाय, नाश्ता आदि देने समय बातचीत होती थी। धीरे-धीरे उनकी भाषा बोलना सीख गई। जिससे वे किया ऑर्डर कर रहे यह समझ लेती है।
Published on:
28 Aug 2020 12:00 am
