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आइआइटी जोधपुर में इस साल 8 विषयों में बीटैक

iit jodhpur - 12 साल बाद 4 विषय से 8 विषय मे बीटैक- केमिकल, सिविल, मेटलर्जी और एआई पाठ्यक्रम पहली बार- रिफाइनरी को देखते हुए केमिकल इंजीनियरिंग में पेट्रोलियम का पाठ्यक्रम भी सम्मिलित
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आइआइटी जोधपुर में इस साल 8 विषयों में बीटैक

आइआइटी जोधपुर में इस साल 8 विषयों में बीटैक

जोधपुर. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर ने अपनी स्थापना के 12 साल बाद अब बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (बीटैक) पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव किया गया है। अब तक चार विषयों में बीटैक हुआ करती थी जो इस साल से अब आठ विषय में होगी।
यहां अब तक इलेक्ट्रिकल, कंप्यूटर साइंस, मैकेनिकल और बायोइंजीनियरिंग में बीटैक की डिग्री दी जाती थी। शैक्षणिक सत्र 2020-21 से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड डाटा साइंस, केमिकल इंजीनियरिंग, सिविल एंड इन्फ्राट्रक्चर इंजीनियरिंग और मैटेरियल्स इंजीनियरिंग विषय शामिल किए गए हैं। इसी के साथ छात्र छात्राओं की संख्या भी 1444 से बढकऱ 2500 तक हो जाएगी। पिछले साल की तुलना में आइआइटी में फैकल्टी में लगभग दोगुनी हो गई है।

एमबीए और मेडिकल टेक्नोलॉजी में पीजी
स्नातक कार्यक्रम के अलावा इस साल से आइआइटी जोधपुर ने टेक्नोलॉजी में एमबी शुरू किया है जो देश में अपनी तरह का विशिष्ट पाठ्यक्रम है। एम्स जोधपुर के साथ मिलकर मेडिकल टेक्नोलॉजी में स्नातकोत्तर और पीएचडी भी शुरू की है। इसकी पढ़ाई आइआइटी और एम्स दोनों में होगी। एम्स के डॉक्टर मेडिकल की पढ़ाई करवाएंगे, जबकि आइआइटी के तकनीशियन तकनीक पढ़ाएंगे। विद्यार्थी को दोनों संस्थान मिलकर डिग्री देंगे। गौरतलब है कि गत वर्ष 7 दिसम्बर को एम्स जोधपुर के दीक्षांत समारोह में शिरकत करने आए देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने दोनों संस्थानों को मिलकर नॉलेज इनोवेशन क्लस्टर शुरू करने और साथ में अनुसंधान करने की सीख दी थी। राष्ट्रपति ने कहा था कि देश में ऐसे गिने-चुने ही शहर है जहां आइआइटी व एम्स एक साथ है। डॉक्टरी व इंजीनियरिंग की समझ एक ही विद्यार्थी को इससे डॉक्टरी व इंजीनियरिंग दोनों की समझ एक विद्यार्थी में होगी। वर्तमान में रेडियो डायग्नोसिस जैसे विभाग में सीटी स्कैन, एमआरआई, एक्स-रे, सोनोग्राफी, मैमोग्राफी जैसी मशीनें है जो इंजीनियर तैयार करते हैं लेकिन मरीज के स्वास्थ्य के परिपेक्ष्य में डॉक्टर इसकी जांच करते हैं। कई बार मशीनों की जांच रिपोर्ट को डॉक्टरों को समझने में परेशानी आती है। मशीन में छोटी-मोटी खराबी होने पर भी इंजीनियर को बुलाना पड़ता है। डॉक्टरों को मशीन की रिपोर्ट पढऩे के लिए प्रशिक्षण की भी जरुरत रहती है।

- 2008 में स्थापित हुई थी आइआइटी जोधपुर
- 4 विषयों में अब तक होती थी बीटैक
- 8 विषयों में इस साल से होगी बीटैक
- 2500 छात्र-छात्राएं हो जाएंगे इस साल
- 150 हो गई है शिक्षकों की संख्या बढकऱ

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