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27 वर्ष में 8100 दिन रामदेवरा की दंडवत यात्रा में बिताए 70 वर्षीय भक्त आईदानाराम ने

जोधपुर-रामदेवरा सडक़ मार्ग पर रामदेवरा की ओर बढ़ रहे एक वृद्ध की बाबा के प्रति ऐसी भक्ति है कि वे पिछले 27 वर्षों में 8100 दिन केवल रामदेवरा के लिए दंडवत यात्रा पर ही रहे।
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In 27 years, 8100 days were spent in the worship of Ramdevra

27 वर्ष में 8100 दिन रामदेवरा की दंडवत यात्रा में बिताए 70 वर्षीय भक्त आईदानाराम ने

चामू (जोधपुर) . कस्बे से होकर गुजरने वाले जोधपुर-रामदेवरा सडक़ मार्ग पर रामदेवरा की ओर बढ़ रहे एक वृद्ध की बाबा के प्रति ऐसी भक्ति है कि वे पिछले 27 वर्षों में 8100 दिन केवल रामदेवरा के लिए दंडवत यात्रा पर ही रहे। ये कहानी नागौर जिले के खारी डेरवा निवासी 70 वर्षीय भक्त आईदानाराम की है।

वे पिछले 27 सालों से साल में 300 दिन इसी यात्रा पर रहते हैं। उनके इस जज्बे को देख तीन जिलों के कई गांवों के लोग दर्शन के लिए उमड़ पड़ते हैं। जब वे यात्रा पर रहते हैं तो लोग इनके पीछे पहुंचकर घर से बना खाना पहुंचाते हैं।


आईदानाराम बताते है कि वे रामदेवरा की 27 यात्रा पूरी कर चुके हैं। अब 28 वीं यात्रा गोमाता के नाम यात्रा कर रहे हंै। इनकी यात्रा झुंझाला नागौर से रामदेवरा हर वर्ष चलती है। जब वे लोड़ता पहुंचे तो उन्हें देखने लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह वीणा की धुन पर आरती करते समय उनका दर्शन करने स्थानीय ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ती है।


श्रद्धा ऐसी कि परेशानियों में भी खुशी


अकेले रामदेवरा के लिए दंडवत यात्रा करने वाले संत आईदानाराम परेशानियों में ही खुशियां मानते हैं। उनका मानना है कि भक्ति की श्रद्धा के कारण कैसा भी मौसम हो गीत-बाजे के साथ उनका रथ यूं ही यात्रा के लिए चलता रहता है। उन्हें कोई परेशानियां महसूस ही नहीं होती है। उनके लिए भोजन व पानी की व्यवस्था भी रास्ते में श्रद्धालु ही करते हैं।


रथ में जलती है 24 घंटे अमृत ज्योत


दंडवत 350 किमी लंबी यात्रा में उनके साथ चलने वाले रामदेव रथ में 24 घंटे अमृत ज्योत भी जलती है। यात्रा के दौरान सडक़ पर चलने वाले वाहन चालक व भक्त रामदेव की ज्योत के दर्शन करते है।


आईदानाराम नागौर गुसांई महाराज स्थल जुंझाला से कनक दंडवत यात्रा के दौरान रथ में ज्योत लेकर यात्रा की शुरूआत करते हैं । जोधपुर के मसूरिया पहाड़ी पर बने मंदिर में दर्शन करने के बाद रामदेवरा की ओर बढ़ते हैं। रामदेवरा में रामदेव बाबा के दर्शन करने के बाद वापस रथ के माध्यम से ज्योत नागौर के गोसांई मंदिर की ज्योत मिलाकर यात्रा का समापन करते हैं।

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