़पाण्डुलिपियों के संरक्षण के साथ उनपर शोध जरूरी : डॉ. राजेश कुमार


पाण्डुलिपि पठन एवं भाषा विज्ञान कार्यशाला का शुभारम्भ

By: Nandkishor Sharma

Updated: 19 Mar 2021, 11:29 AM IST

जोधपुर. भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली के सौजन्य से एवं राजस्थानी शोध संस्थान, चौपासनी के तत्वावधान में सात दिवसीय 'पाण्डुलिपि पठन एवं संरक्षणÓ कार्यशाला का आगाज गुरुवार को राजस्थानी शोध संस्थान, चौपासनी में किया गया। उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. राजेश कुमार, निदेशक, भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली ने कहा कि राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन के माध्यम से कई प्रकार से पाण्डुलिपियों के संरक्षण, सुधार आदि कार्य व्यापक स्तर पर हो रहा है, किन्तु उन पाण्डुलिपियों को पढऩे और शोध से सम्बन्धित कार्य भी व्यापक स्तर पर होना चाहिए। ऐसे में राजस्थानी शोध संस्था की ओर से सतत् रूप से किया जा रहा कार्य इतिहास की दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है और शोध की नवीन विधाओं को उजागर कर सकता है। समारोह की अध्यक्षता चौपासनी शिक्षा समिति के अध्यक्ष सिद्धार्थसिंह रोहट ने की। समिति के मानद् सचिव प्रहलादसिंह राठौड़ ने संस्थान में भी ठिकाना रिकॉर्ड का संग्रह संरक्षित है जिस पर शोध किया जा सकता है। कार्यक्रम में राजस्थानी शोध संस्थान के सहायक निदेशक डॉ. विक्रमसिंह भाटी संपादित पुस्तक 'राजस्थान के समाज-संस्कृति में अप्रकाशित शिलालेखों का महत्वÓ का विमोचन अतिथियों ने किया। अंत में चक्रवर्तीसिंह ने अतिथियों का आभार जताया।

Patrika
Nandkishor Sharma Desk
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