
मिग-27 का अंतिम युद्धाभ्यास होगा वायुशक्ति-2019, केवल जोधपुर में ही बचा है यह विमान
गजेंद्र सिंह दहिया/जोधपुर. वायुसेना के ग्राउण्ड अटैक एयरक्राफ्ट मिग-27 (अपग्रेडेड) का वायुशक्ति-2019 अंतिम युद्धाभ्यास है। तीन दिन बाद पोकरण स्थित चांधण फील्ड फायरिंग रेंज में वह अंतिम बार फायर पावर डेमोस्ट्रेशन करेगा। पश्चिम बंगाल के हाशिमारा एयरफोर्स स्टेशन से मिग-27 (बहादुर) की सेवानिवृत्ति के बाद अब देश में केवल जोधपुर में ही मिग-27 एयरक्राफ्ट बचा है। यह अपग्रेडेड वर्जन कहलाता है। जोधपुर में मिग-27 की दो स्क्वाड्रन है। स्क्वाड्रन संख्या-10 ने अपनी फ्लाइंग बंद कर दी है। यह 31 मार्च को रिटायर हो रही है। इसका समारोह जोधपुर एयरबेस पर होगा।
स्क्वाड्रन संख्या-29 इस साल दिसम्बर के अंत में रिटायर हो जाएगी। यही स्क्वाड्रन तीन दिन बाद पोकरण में होने वाले वायुशक्ति में भाग ले रही है। गौरतलब है कि तत्कालीन सोवियत संघ ने भारत को मिग श्रेणी के विमान उपलब्ध कराए थे। भारत ने 1966 में पहला मिग-21 विमान खरीदा। मिग-27 विमान 1975 में आए। इन विमानों ने 1999 में पाकिस्तान के साथ हुए कारगिल युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
12 साल में 97 विमान खोए
वायुसेना जिस तेजी से अपने लड़ाकू विमान खो रही है, उस गति से इसमें नए विमान नहीं आ रहे है। लोकसभा की स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 12 साल में करीब 97 लड़ाकू विमान क्रेश हुए हैं।
मानव व मशीन दोनों जिम्मेदार
- 65 विमान दुर्घटनाग्रस्त हुए अप्रेल 2007 से लेकर अप्रेल 2012
- 29 दुर्घटना तकनीकी खराबी के कारण
- 27 दुर्घटना मानवीय भूल के कारण (एयर क्रू)
- 2 दुर्घटना में दोनों कारण जिम्मेदार
- 28 विमान दुर्घटनाएं हुई 2012 से 2016 के दौरान
- 50 प्रतिशत दुर्घटना मानवीय भूल व इतनी ही मशीनी खराबी से
42 की जगह केवल 31 स्क्वाड्रन
लड़ाकू विमान ------ स्क्वाड्रन संख्या
मिग-21 ------ 6
मिग-27 ------ 2
मिग-29 ------ 3
जगुआर ------ 6
सुखोई-30------ 11
मिराज-2000------ 3आने वाली नई स्क्वाड्रन
लड़ाकू विमान ------ स्क्वाड्रन संख्या
सुखोई-30 ------ 3
तेजस ------ 1
राफेल ------ 2
Published on:
13 Feb 2019 10:57 am
